प्रयागराज। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पहली बीवी उम्मुल मोमिनीन यानी मोमिनों की मां हजरत सैयदा खदीजा तुल कुबरा रदियल्लाहु अन्हा की याद में कुरान की सामूहिक तिलावत हुई। अस्ताना सूफी सैयद अबरार आलम समेत कई मस्जिदों, दरगाहों में तिलावत का दौर चला। हजरत खदीजा की जिंदगी पर रोशनी डाली गई। उनका यौमे विसाल 10वीं रमजान को हुआ था।
मस्जिद गोला अलमारूफ हाजी गफ्फार में पहला अशरा खत्म होने के बाद कलाम पाक के मौके पर फातिहा ख्वानी हुई। 14 पीर दरगाह हाईकोर्ट के सूफी सुल्तान साहब कादरी ने बताया, हजरत खदीजा बहुत. बुलंद किरदार थीं। वह आबिदा और जाहिदा महिला थीं। हजरत खदीजा ने गरीब मिस्कीनों की मिसाली इमदाद की पैगंबरे इस्लाम ने जब ऐलाने नबुव्वत किया तो महिलाओं में सबसे पहले ईमान लाने वाली महिला हजरत खदीजा थीं। खातूने जन्नत हजरत फातिमा जहरा उन्हीं की बेटी हैं। मस्जिद मुंह मुबारक सेवई मंडी के हाफिज इरफान रजा हबीबी कहते हैं, हजरत खदीजा का मक्का शरीफ में कपड़े का बहुत बड़ा व्यापार था।
वह हजरत खदीजा पैगंबरे इस्लाम की पहली बीवी बनीं। अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व अमान की दुआ मांगी गई।
