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मानसिक रूप से सशक्त हो रही है महिलाएं-श्रीमती कटियार

  • मानसिक रूप से सशक्त हो रही है महिलाएं-श्रीमती कटियार

मुक्त विश्वविद्यालय में साप्ताहिक अटल जन्मोत्सव व्याख्यानमाला का समापन

प्रकाशनार्थ 28/12/2020

महिलाएं आज प्रत्येक क्षेत्र में बराबरी की सहभागिता के साथ आगे बढ़ रही हैं। वर्जनाओं एवं सीमाओं को आज तोड़ा जा रहा है। महिलाएं मानसिक रूप से सशक्त हो रही हैं लेकिन अभी भी बहुत बड़ा संघर्ष एवं व्यवस्था परिवर्तन होना बाकी है।
उक्त उद्गार श्रीमती नीलिमा कटियार, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित साप्ताहिक अटल जन्मोत्सव समारोह के समापन अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला में व्यक्त किए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्रीमती कटियार ने मिशन शक्ति, उच्च शिक्षा संस्थाओं की भूमिका एवं चुनौतियां विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शक्ति एवं सामर्थ्य मातृत्व से ही पाया जा सकता है। व्यवस्था परिवर्तन का आधार उसके सामर्थ्य और शक्ति से ही संभव है। श्रीमती कटियार ने कहा कि भारत में महिलाओं में कुपोषण एवं रक्ताल्पता की अधिकता पाई जाती है। जिसकी वजह से हर महीने की 9 तारीख को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जननी सुरक्षा दिवस का आयोजन किया जा रहा है।यह समाज का कार्य है कि वह महिलाओं में जागरूकता उत्पन्न करें और उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए केंद्र तक पहुंचाने में मदद करें। श्रीमती कटियार ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा बल में महिलाओं को स्थान दिया जा रहा है । वहीं सीआरपीएफ की दो बटालियन महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। पुलिसिंग में 35% स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। मुद्रा योजना के अंदर ऐसे प्रावधान हैं जिनमें महिलाओं को 70% वरीयता दी जा रही है। मनरेगा में भी दुर्गम प्रकार के कार्यों में महिलाएं देश के विकास में योगदान दे रही हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में महिलाएं सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर पदक प्राप्त कर रही हैं। नामांकन दरों में भी महिलाओं ने आगे बढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है तथा व्यवस्थाओं में भी उन्हें वरीयता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी मंगल मिशन में भी 27% महिला वैज्ञानिक हैं।साथ ही कोर ग्रुप में नेतृत्व करने वाली वैज्ञानिक भी महिला है।
महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अभी 10 दिन पहले नलकूप चालक की भर्ती प्रक्रिया का जब परिणाम घोषित किया गया तो उसमें भी कानपुर की कल्पना ने टॉप किया। उन्होंने प्रश्नचिन्ह खड़ा किया कि हम गलत कहां थे जो आज मिशन शक्ति की आवश्यकता पड़ रही है। नैसर्गिक रूप से हम प्राचीन काल से ही अर्धनारीश्वर स्वरूप को पूजते रहे हैं।आज हमें फिर अपने पुराने स्वरूप में लौटना पड़ रहा है और आराध्य को देखने वाले देश में यह मिशन चलाना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि यह परिवार की जिम्मेदारी है कि वह बेटे बेटी को बराबरी का दर्जा देकर पालें। उन्होंने कहा कि मूल मानसिकता में परिवर्तन किए बिना हम भवन तैयार कर लें तो वह लंबे समय तक आसरा देने वाला नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर प्रारंभ से ही दिशा निर्देशक एवं मार्गदर्शक रहे हैं। हर परिसर अपने परिवेश के अनुसार परिवर्तन लाएगा, जिससे समाज में संतुलन स्थापित होगा। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती कटियार ने कहा कि महिलाएं आज चारों दिशाओं में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। इतना ही नहीं आज मातृत्व अवकाश को दोगुना करके पितृत्व अवकाश भी प्रदान किया जा रहा है। छात्राओं को आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी एवं साहसी बनाने में उच्च शिक्षा संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि जिस परिवार एवं समाज में महिला का सम्मान नहीं होगा, वह उजड़ जाएगा। हमें महिलाओं के सम्मान की शुरुआत घर से ही करनी चाहिए। जिस तरह हम ज्ञान के लिए सरस्वती की आराधना करते हैं, धन के लिए लक्ष्मी की आराधना करते हैं और शक्ति के लिए दुर्गा की आराधना करते हैं, उसी प्रकार समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए हमें महिलाओं का सम्मान करना होगा। कुलपति प्रोफेसर सिंह ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय ने जिन गांवों को गोद लिया है, वहां की लड़कियों की शिक्षा नि:शुल्क कर दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर के बाहर भी विराट समाज है। हमें उनकी अपेक्षाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरना है। बाधाओं को चिन्हित करें एवं संवाद स्थापित करें। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान समाज और राष्ट्र के प्रति जवाबदेह संस्थान बनें। नीति नियम ही नहीं बनाए बल्कि यथार्थ के धरातल पर क्रियान्वयन करके सरकार की योजनाओं में सहयोग प्रदान करें।
व्याख्यानमाला का संचालन डॉ सुरेंद्र कुमार ने तथा अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन अटल बिहारी वाजपेई सुशासन पीठ के निदेशक प्रोफेसर पीके पांडे ने किया। अतिथियों का परिचय डॉ दिनेश सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ अरुण कुमार गुप्ता ने किया। इस अवसर पर लोकमान्य तिलक शास्त्रार्थ सभागार में विश्वविद्यालय के निदेशक, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र एवं कई प्रतिभागी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

खबर नीतेश सोनी

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