विशेष अदालत ने 34 बच्चों के यौन शोषण और उनकी अश्लील तस्वीरें व वीडियो वायरल करने के घृणित मामले में सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने तीसरे आरोपी की फाइल अलग कर दी। उस पर ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने का आरोप है। जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर है।
विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 163 पेज के विस्तृत फैसले में इस घिनौने अपराध को जघन्यतम करार दिया। कोर्ट ने कहा, कई जिलों में बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दिया गया। दोषियों का नैतिक स्तर पर हद दर्जे तक नीचे गिरना इसे असाधारण घिनौना अपराध बनाता है। इनमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, इसलिए कड़ी से कड़ी सजा की जरूरत है।
कोर्ट ने यूपी सरकार को पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। साथ ही, आरोपियों के घर से बरामद राशि को भी पीड़ित बच्चों में समान रूप से वितरित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने रामभवन को अलग-अलग धाराओं में दोषी पाते हुए 6.45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
