देहरादून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, यूएन उम्मीद कर रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक समुदाय का नेतृत्व करेगा, जबकि यह आतंकवाद की नर्सरी है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से पाकिस्तान को फंडिंग रोकने की अपील करते हुए कहा, अब इसे खाद पानी नहीं दिया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री मंगलवार को देहरादून में अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में राष्ट्र सुरक्षा का संकल्प विषय पर बोल रहे थे। राजनाथ ने कहा, दुनिया में जहां भारत को लोकतंत्र की जननी के रूप में पहचाना जाता है, वहीं पाकिस्तान ने वैश्विक आतंकवाद के जन्मदाता की छवि बनाई है। यह कैसे भुलाया जा सकता है कि यह वही पाकिस्तान है जो आतंकी संगठनों की पनाहगाह है, जहां हाफिज सईद व मसूद अजहर जैसे घोषित आतंकी खुलेआम घूमते हुए जहर उगल रहे हैं। पाकिस्तानी सेना के अफसर आतंकियों के जनाजे में फातिहा पढ़ते नजर आते हैं। इसे अनदेखा करतेहुए यूएन पाकिस्तान से आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में विश्व का नेतृत्व करने की उम्मीद कर रहा है। यह किसी क्रूर मजाक से कम नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नीयत व नीतियों दोनों पर गहरे सवाल खड़े करता है।
राजनाथ ने कहा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र की बड़ी जिम्मेदारी है। दुर्भाग्यवश हाल के वर्षों में उसके निर्णयों पर सवालिया – निशान लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में -पाकिस्तान को आतंक रोधी कार्रवाई पैनल का उपाध्यक्ष बनाना ताजा उदाहरण है। राजनाथ ने इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उपहास के रूप में बताया। सिंह ने कहा, यह पैनल 9/11 हमले के बाद बना था। मगर, किसी से छिपा नहीं है कि यह हमला किसने कराया था। इसके मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को किसने शरण दी थी। यूएन के इस निर्णय को उन्होंने दूध की रखवाली बिल्ली से कराए जाने जैसा बताया। कहा, यह निर्णय आतंकवाद पर यूएन जैसी संस्था की गंभीरता पर भी सवाल उठाता है। राजनाथ ने उन देशों को भी घेरा जो पाकिस्तान को फंडिंग कर रहे हैं।
