प्रयागराज। यमुना विहार आवास योजना में दस अधूरे टावरों पर 38.85 करोड़ पीडीए ने बेवजह खर्च कर दिए। ऑडिट के बाद सीएजी ने इस पर आपत्ति जताई है। सीएजी की नई आवासीय योजनाओं को शुरू न करने और बेवजह खर्च करने को लेकर 11 जून को लेखा समिति के समक्ष अफसरों की पेशी लखनऊ में होगी। अगर पीडीए के जवाब से समिति सहमत नहीं हुई तो कार्रवाई भी हो सकती है।
पीडीए ने मध्यम आय वर्ग के लिए वर्ष 2016 में नैनी में आवास योजना शुरू की थी। इसके अंतर्गत 284.41 करोड़ की लागत से 15 बहुमंजिला टावरों में 1200 फ्लैटों का निर्माण होना था। निर्माण के लिए ठेकेदार के साथ अनुबंध दिसंबर 2016 में किया गया।
कार्य प्रारंभ करने की तिथि दिसंबर 2016 और पूर्ण करने की तिथि दिसंबर2019 तय की गई। लेकिन, निर्माण कार्य नहीं हुआ। ऑडिट में पाया गया है कि फ्लैटों की अपर्याप्त मांग के कारण पीडीए ने अनुबंध को समाप्त करने के लिए एक समिति का गठन वर्ष 2019 में किया था।
तब तक पूरी परियोजना के लिए बेसमेंट, फर्श और भूमिगत पानी की टंकी का निर्माण और 1200 फ्लैटों के 15 टावरों में से 192 फ्लैटों के दो टावरों का निर्माण पूरा हो चुका था। निर्मित 192 में से केवल 32 फ्लैटों को ही आवंटित किया जा सका था। शेष 160 फ्लैटों की बिक्री नहीं हुई।
इसके बाद अपूर्ण टावरों की नीलामी के लिए बोर्ड के समक्ष एक प्रस्ताव प्रस्तुत कर ठेकेदार की जिम्मेदारी तय की गई। लेखा परीक्षक ने ऑडिट में पाया कि निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित करने से पहले परियोजना के तहत फ्लैटों की बिक्री के लिए मांग सर्वेक्षण आवश्यक था। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया।
उधर, ठेकेदार को मार्च 2022 में 83 करोड़ के भुगतान पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। कहा गया है कि इसमें करीब 38.85 करोड़ का भुगतान अधूरेटावरों के बेसमेंट, फर्श आदि के निर्माण के लिए किया गया था। शेष 44 करोड़ का भुगतान दो टावरों के निर्माण और इससे संबंधित कार्य के लिए किया गया।
आवास योजना के अंतर्गत 1200 फ्लैटों का निर्माण प्रारंभ करने से पूर्व दस अधूरे टावरों के विकास पर 38.85 करोड़ का बेवजह का खर्च किया गया।मांग की कमी के कारण फ्लैटों की बिक्री भी नहीं हो सकी है।
