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यूपीएससी 2015 के अपने दूसरे प्रयास में न केवल पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन किया बल्कि 5वीं रैंक के साथ परीक्षा में किया टॉप

यूपीएससी देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। हालांकि कुछ लोगों के अंदर ऐसा जुनून होता है की वह पहले या फिर दूसरे प्रयास में ही यह परीक्षा क्लियर कर लेते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं शशांक त्रिपाठी जिन्होंने पहले ही प्रयास में यह परीक्षा पास तो कर ली थी लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और दूसरे अटेम्प्ट में टॉप किया।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के रहने वाले शशांक ने कक्षा 12 की पढ़ाई नवाबगंज के दीनदयाल उपाध्याय स्कूल से की है। उनके पिता भी इसी स्कूल में हेड क्लर्क हुआ करते थे। हमेशा से घर में पढ़ाई का माहौल होने के चलते शशांक भी पढ़ाई में काफी अच्छे थे और इसी वजह से उन्होंने कक्षा 12वीं में 93% अंक प्राप्त किए थे।‌
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद शशांक ने IIT Kanpur से साल 2013 में बैचलर्स की डिग्री पूरी की। अधिकतर छात्र ग्रेजुएशन के दौरान प्लेसमेंट के इच्छुक होते हैं लेकिन शशांक ने कॉलेज प्लेसमेंट में न बैठने का फैसला किया था। इंजीनियरिंग करने के बावजूद भी शशांक भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते थे। इसी जुनून के चलते साल 2014 में यूपीएससी परीक्षा के पहले अटेम्प्ट में ही उन्होंने 272वीं रैंक प्राप्त की थी। जिसके बाद नागपुर में इंडियन रिवेन्यू सर्विस (Indian Revenue Services) के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई। हालांकि, अपनी इस सफलता के बावजूद भी शशांक संतुष्ट नहीं थे।

प्रशासनिक सेवा में जाने के इच्छुक शशांक ने ट्रेनिंग के दौरान ही दुगनी मेहनत के साथ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी थी। ट्रेनिंग और पढ़ाई में संतुलन बना कर चलना बेहद मुश्किल था लेकिन फिर भी उन्होंने अपना हौसला कम नहीं होने दिया। शशांक ने नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार उनकी इस मेहनत ने असर दिखा ही दिया। शशांक ने यूपीएससी 2015 के अपने दूसरे प्रयास में न केवल पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन किया बल्कि 5वीं रैंक के साथ परीक्षा में टॉप भी किया।

बता दें कि शशांक ने संस्कृत को अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में चुना था। उन्होंने यूपीएससी की मेन्स परीक्षा में 824 अंक और इंटरव्यू में 172 अंक प्राप्त किए थे। शशांक कहते हैं कि जब तक आपका सपना पूरा न ह जाए तब तक मेहनत करते रहना चाहिए। शशांक ने भी इसी तरह मेहनत की और परिवार वालों का नाम रोशन किया।

Samiksha

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