जम्मू। संघर्ष विराम के पांच दिन पूरे हुए। बिना फटे पड़े गोलों और मोर्टार को हटाने के लिए ऑपरेशन क्लीयरेंस युद्धस्तर पर जारी है। ज्यादातर इलाकों में बंकरों से लोग घर आ चुके हैं। गली-मोहल्लों-सड़कों पर पसरा सन्नाटा भी धीरे-धीरे खत्म होने लगा है। फिर भी हालात ऐसे नहीं, जिसे पूरी तरह से सामान्य कहा जा सके। तनाव और असमंजस कहीं न कहीं बरकरार है। पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर किसी को भरोसा नहीं। सीमावर्ती क्षेत्र के लोग कहते हैं कि जब शहर के बीचोबीच बने मकान खंडहर में तब्दील हो गए, लोगों की जान चली गई, तो हम तो सीमा के एकदम करीब हैं। वहीं, शहर में रहने वालों का कहना है कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि जम्मू भी हमले का शिकार होगा। यही वजह है कि लोग सजग और चौकस हैं। आज भी ज्यादातर लोग ब्लैकआउट का पालन कर रहे हैं। बंकरों की सफाई रोजाना की जा रही है और रिश्तेदारों के यहां भेजे गए बुजुर्ग, महिला और बच्चों को बुलाने से परहेज दिखाई दे रहा है। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती व उन इलाकों से रिपोर्ट जहां पाकिस्तान ने हमले किए थे…
