संयुक्त राष्ट्र। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन-रूस संघर्ष का ठीकरा फिर भारत और चीन पर फोड़ा। इप ने कहा, भारत-चीन तेल खरीदकर रूस को वित्तीय मदद देने वाले प्राथमिक देश हैं। हालांकि उन्होंने इस बार नाटो देशों को भी निशाने पर लिया। कहा, नाटो के कई देश में रूस से ऊर्जा की खरीद कर रहे हैं। ट्रंप ने रूस पर भारी टैरिफ लगाने का संकेत भी दिया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 80वें सत्र में 150 से अधिक देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, भारत व चीन यूक्रेन युद्ध में रूस को वित्तपोषित करने वाले प्राथमिक देश हैं। दोनों रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहे हैं। नाटो देशों ने भी रूसी उत्पादों की खरीद पर रोक नहीं लगाई है, यह बात अक्षम्य है। जब मुझे यह बात पता चली, तो मैं इससे खुश नहीं हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, जरा सोचिए, वे (नाटो) अपने ही खिलाफ युद्ध को फंड कर रहे हैं। आखिर किसने इसके बारे में सुना है? ट्रंप ने कहा, अगर रूस युद्ध खत्म करने के लिए कोईसमझौता करने को तैयार नहीं होता, तो उस पर बहुत कड़े टैरिफ लगाने की तैयारी है। मेरा मानना है, इससे यह खून-खराबा बहुत जल्द रुक जाएगा। के ट्रंप ने यूरोपीय देशों से भी इसी तरह टैरिफ लगाने की मांग करते हुए कहा, टैरिफ को प्रभावी बनाने के लिए, यूरोपीय देशों को हमारे साथ मिलकर ठीक यही उपाय अपनाने होंगे। मेरा मतलब है, आप युद्ध स्थल के बहुतकरीब हैं। हम दूर हैं, हमारे बीच एक महासागर की दूरी है, आप वहीं हैं. इसलिए यूरोप को इसे और तेज करना होगा। वे रूस से तेल-गैस खरीद रहे हैं। यह उनके लिए शर्मनाक है। उन्हें रूस से सभी ऊर्जा खरीद तुरंत बंद करनी बर्बाद कर रहे होंगे। हम आज यहां होगी. अन्यथा, हम सब बहुत समय इकट्ठा हुए सभी यरोपीय देशों के साथ इस पर चर्चा करने जा रहे हैं।
