नई दिल्ली। ब्रह्मोस मिसाइल से लैस, दुश्मनों के रडार से बचने में सक्षम और अब तक का सबसे घातक आधुनिक स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस तमाल मंगलवार को भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गया। इस बहुउद्देशीय स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत का जलावतरण रूस के केलिनिन ग्राद में हुआ। नौसेना के पश्चिमी बेड़े स्वॉर्ड आर्म में शामिल यह युद्धपोत अरब-हिंद सागर में तैनात होगा और पाकिस्तान से लगती सीमा पर निगरानी में भारत की सबसे बड़ी समुद्री ताकत होगा। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वीएडीएम संजय जे सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि समारोह की अध्यक्षता की। तमाल युद्धपोत पिछले दो दशकों में रूस से प्राप्त क्रिवाक श्रेणी के युद्धपोतों की श्रृंखला में आठवां घातक युद्धक जलयान है। यह तुशील श्रेणी का ऐसा दूसरा युद्धपोत है, जो पूर्ववर्ती संस्करणों तलवार और तेग श्रेणी की तुलना में अधिक उन्नत है ।
तमाल शस्त्रागार में अपने पूर्ववर्ती युद्धपोतों की तुलना में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनमें लंबवत प्रक्षेपित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत 100 मिलीमीटर तोप, मानक 30 मिलीमीटर गन क्लोज-इन हथियार प्रणाली के आलावा आधुनिक समय की ईओ/आईआर प्रणाली, अत्यधिक भार वाले टारपीडो, तत्काल हमला करने वाले पनडुब्बी रोधी रॉकेट और अनेक निगरानी एवं अग्नि नियंत्रण रडार तथा अन्य प्रणालियां शामिल हैंइंद्र की पौराणिक तलवार की तरह है मारक क्षमता : युद्धपोत का नाम तमाल देवताओं के राजा इंद्र की पौराणिक तलवार से लिया गया है। इसकी मारक क्षमता भी उसी की तरहतेज, आक्रामक और निर्णायक है। इस जहाज का शुभंकर भारतीय पौराणिक कथाओं के अमर भालू राजा जाम्बवंत और रूसी राष्ट्रीय पशु यूरेशियन भूरे भालू की समानता से प्रेरित है।
