नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने के साथ भारत ने पाकिस्तान को एक और झटका देते हुए जम्मू के रामबन में चिनाब नदी पर बने बगलिहार बांध से पानी का प्रवाह रोक दिया है। साथ ही, झेलम नदी पर बने किशनगंगा बांध पर भी ऐसा ही कदम उठाने की तैयारी है। सूत्रों ने बताया कि बगलिहार जलविद्युत बांध और उत्तरी कश्मीर में किशनगंगा जलविद्युत बांध के जरिये पानी का प्रवाह नियंत्रित करने की शक्ति भारत के पास है। 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि स्थगित करने के बाद भारत इन बांधों के जरिये पाकिस्तान जाने वाला पानी बिना किसी सूचना के कम या ज्यादा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है, यह पाकिस्तान को सख्त संदेश देने की भारतीय रणनीति का हिस्सा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बगलिहार बांध पर स्लुइस स्पिलवेज के गेटों को नीचे कर दिया गया है, ताकि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पानी के प्रवाह को रोका जा सके। यह अल्पकालिक दंडात्मक कार्रवाई है। उन्होंने बताया, यह कदम भले ही थोड़े समय के लिए हो, पर पाकिस्तान को यह बताने के लिए काफी है कि भारत उसे सभी मोर्चों पर दंडित करने के लिए सख्त कार्रवाई करने को तैयार है। बिजली उत्पादन के लिए पानी के इस्तेमाल की इजाजत : चिनाब पर बने बगलिहार बांध को जल विद्युत उत्पादन के लिए नदी के बहाव पर आधारित संयंत्र के रूप में डिजाइन किया गया है। चिनाब सिंधु जल प्रणाली की पश्चिमी नदियों में से एक है और संधि बिजली उत्पादन के लिए इसके पानी का उपयोग करने की इजाजत देती है।
