नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के बाद वनतारा को क्लीनचिट दे दी। साथ ही, कहा कि जामनगर स्थित वनतारा एनिमल रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र सभी कानूनों और नियमों का पालन करता पाया गया है, इसलिए उस पर गैरजरूरी आपत्तियों की इजाजत नहीं दी जाएगी।
जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस प्रसन्ना वी वरले की पीठ ने कहा कि देश में कुछ अच्छी चीजें भी होने दें। हर मुद्दे पर हल्ला मचाना ठीक नहीं है। हमें इस तरह की पहल पर गर्व होना चाहिए। पीठ ने एसआईटी की जांच पर संतोष जताया और कहा कि आदेश रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ही दिया जाएगा। सरकार को रिपोर्ट की सिफारिशेंलागू करने का सुझाव दिया जा सकता है। पीठ ने साफ किया कि जब स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट सामने है, तो बार-बार आपत्तियां उठाने की अनुमति नहीं होगी। बनतारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने रिपोर्ट कॉ गोपनीय रखने की अपील की। मंदिरों से हाथियों को लाने का मुद्दा उठा : याचिकाकर्ता ने हाथियों को मंदिरों से वनतारा लाने पर आपत्ति जताई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर यह प्रक्रिया कानून के तहत है, तो समस्या क्यों? मंदिरों में जानवरों का दुरुपयोग होता है। अगर कोई हाथी को लेकर नियमों के अनुसार देखभाल करना चाहता है, तो इसमें दिक्कत क्या है? नहीं तो यही जानवर दशहरे जैसे आयोजनों में व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रताड़ित किए जाते हैं।
तस्करी का लगाया था आरोप: मामला याचिकाकर्ता सीआर जया सुकिन की उस अर्जी से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि वनतारा में जानवरों की तस्करी और दुर्व्यवहार हो रहा है। इस पर शीर्ष कोर्ट ने 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जे चेलमेश्वर की अगुवाई में एसआईटी बनाई थी। शुक्रवार को एसआईटी ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी थी।
