सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिका में की गई कुछ बातों पर सख्त आपत्ति जताई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता शशांक शेखर झा से कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में की गई बातों के प्रति सावधान और जिम्मेदार होना चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें हमेशा संस्था की अखंडता और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। प्रचार की तलाश न करें। उन्होंने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट एक ‘कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड’ है, इसलिए कोर्ट में दी गई दलीलें आने वाली पीढ़ियों के लिए होंगी। इसलिए दलीलों में शालीनता बनाए रखने व आपत्तिजनक बयानों से बचने की जरूरत है। जब जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि याचिकाकर्ता अनुच्छेद-226 के तहत हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकता, तो याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि हिंसा के कारण राज्य से बाहर चले गए प. बंगाल के कई लोगों ने उनसे संपर्क किया था। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि याचिका में ऐसे व्यक्तियों का कोई ब्योरा नहीं है। अन्य राज्यों में लोगों के प्रवास के बारे में जानकारी के स्रोत के बारे में पूछे जाने पर याचिकाकर्ता ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट। इस पर पीठ ने कहा, तो आपने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर याचिका दायर की है! आपने सत्यापन कहां किया है? इसके बाद वकील ने याचिका वापस लेने और संशोधित याचिका दायर करने की इजाजत मांगी जिसकी पीठ ने मंजरी दे दी।
