नई दिल्ली। देश में अब बारिश के मौसम में बच्चे संक्रमण का शिकार नहीं बनेंगे। लंबे शोध और अथक परिश्रम के बाद वैज्ञानिकों ने स्वदेशी साल्मोनेला टीका तैयार किया है। टाइफाइड, पैरा टाइफाइड और साल्मोनेला टायफी म्यूजियम से होने वाली गंभीर आंतों की बीमारियों से यह टीका बचाव करेगा। साल 2026 तक इसे देश के सभी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
जानकारी के अनुसार, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पश्चिम बंगाल स्थित राष्ट्रीय जीवाणु संक्रमण अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों नेटाइफाइड के खिलाफ दुनिया का पहला मिश्रित टीका विकसित किया है। यह टीका साल्मोनेला बैक्टीरिया के अलग-अलग दो स्ट्रेन से बचाव करने में सक्षम है। टाइफाइड से बचाव करने वालेवीआई पॉलीसेकेराइड वैक्सीन टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (टीसीवी) जैसे टीके मुख्य रूप से साल्मोनेला टाइफी को ही लक्षित करते हैं जबकि सालमोनेला पैराटाइफी ए संक्रमण के खिलाफ यह सुरक्षा प्रदान नहीं करते। नया टीका दोनों रोग जनकों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके उत्पादन के लिए आईसीएमआर एक निजी कंपनी को तकनीक हस्तांतरित कर दी है।
