नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्याओं को निर्वासित किए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका के तथ्यों को कोरी कल्पना बताते हुए याचिकाकर्ता से कहा, जब देश कठिन समय से गुजर रहा है तब आप ऐसी गजब की काल्पनिक कहानी लेकर आए हैं। पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि देश के बाहर बैठे लोगों को हमारी संप्रभुता पर हुक्म नहीं चलाने देंगे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील कोलिन गोंजाल्विस से यह बात कही। दरअसल, गोंजाल्विस एक रोहिंग्या शरणार्थी की याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। याचिका में आरोप था कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के 43 रोहिंग्या शरणार्थियों, जिनमें बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग शामिल थे, को अंडमान ले जाकर वहां समुद्र में छोड़ दिया और उन सभी के पास वापस म्यांमार पहुंचने के सिवा कोई विकल्प नहीं था। वे लोग फिर से म्यांमार के युद्ध क्षेत्र में पहुंच गए हैं। गोंजाल्विस ने कहा कि, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (यूएन, ओएचसीएचआर) ने इस घटना का संज्ञान लेकर जांच शुरू की है।इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, यूएन ओएचसीएचआर की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखें। ऐसे सभी लोग, जो बाहर बैठे हैं, वे हमारी संप्रभुता पर हुक्म नहीं चला सकते। पीठ ने रोहिंग्या शरणार्थियों को निर्वासित किए जाने पर अंतरिम रोक लगाने से भी इन्कार कर दिया। इस मामले की सुनवाई को पीठ ने 31 जुलाई को रोहिंग्या मामले में तीन जजों की पीठ के सामने होने वाली अन्य याचिकाओं की सुनवाई के साथ संबद्ध कर दिया। सुनवाई भी जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई में ही होगी।
