प्रयागराज। संगमनगरी में चाहे सिविल लाइंस की चौड़ी सड़कों की पटरियां हों या किसी मंदिर, अस्पताल या सरकारी कार्यालय का परिसर। वहां अवैध पार्किंग का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। ऐसे परिसरों में मनबढ़ युवकों को लगाकर दो पहिया, चार पहिया वाहनों से पार्किंग के नाम पर खुलेआम वसूली की जा रही है।
शहर में ऐसी दो सौ से अधिक पार्किंग चलाई जा रही हैं, जहां वाहनों पर पर्चियां चिपकाकर आठ से 10 लाख रुपये जनता की जेब से हर रोज निकाले जा रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने ऐसे किसी एक भी दबंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
शहर में अवैध पार्किंग का खेल बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है। पार्किंग संचालकों को नियम -कानून की कोई परवाह नहीं है। मनमाने तरीके से दबंग युवक पार्किंग या वाहन स्टैंड ठेकेदार बनकर अपने हिसाब से वसूली करा रहे हैं। अस्पताल, सरकारी दफ्तर, मॉल, मार्केट एवं सड़कों की पटरियां इनकी वसूली का अड्डा बनी हुई हैं।
अनुमान के तौर पर ऐसे दो सौ से अधिक स्थानों पर लोगों से प्रतिदिन आठ से 10 लाख की वसूली की जा है। दबंगों के आदमी पर्ची भी या करा रहे हैं। बावजूद इसके नगर निगम और यातायात पुलिस ऐसे अवैध पार्किंग संचालकों को लेकर
आंख मूंदे हुए हैं। इसके पीछे मजबूरियां हैं या मिलीभगत, यह जांच का विषय है, लेकिन अब तक जिम्मेदारों की ओर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
• नगर निगम की ओर से कभी भी अवैध पार्किंग को लेकर अभियान नहीं चलाया जाता है। जबकि, नियम है कि अगर कोई भी व्यक्ति अपने निजी परिसर में पार्किंग के नाम पर वसूली कर रहा है तो उसे नगर निगम में इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने के साथ ही कामर्शियल टैक्स देना अनिवार्य है।
लेकिन, नियम को दरकिनार कर स्टैंड के दबंग ठेकेदार नगर निगम, विकास प्राधिकरण और पुलिस की तरफदारी कर अपने हिसाब से पार्किंग संचालित करने में जुटे हैं। इसके चलते सड़क पर जाम तो लगता ही है, आएं दिन मारपीट की घटनाएं भी हो रही हैं। जबकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2022 में अवैध पार्किंग संचालकों के खिलाफ गैंगस्टर व गुंडा एक्ट में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। वसूली से अर्जित संपत्ति जब्त करने का भी सीएम निर्देश दे चुके हैं। बावजूद इसके पार्किंग का अवैध कारोबार पूरे शहर में तेजी से फैल रहा है।
शहर में सिर्फ एक निगम की पार्किंग, बाकी का ब्योरा नदारद :
शहर में सिर्फ एक पार्किंग ही सिविल लाइन पर नगर निगम के द्वारा संचालित किया जा रहा है। बाकी के बारे में नगर निगम के पास कोई ब्यौरा नहीं हैं। नियम कानून की बिना परवाह किए अवैध पार्किंग का कारोबार शहर में फैलता जा रहा हैं।
