नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के प्रारूप के प्रकाशन पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह इस मामले में अब अंतिम निर्णय ही पारित करेगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि वह 29 जुलाई को मामले की अंतिम सुनवाई के लिए समय सीमा तय करेगी।
पीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि वह मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए आधार कार्ड और वोटर पहचान पत्र को स्वीकार करना जारी रखें। पीठ ने सोमवार को विस्तृत सुनवाई नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें दोपहर में मुख्य न्यायाधीश के साथ प्रशासनिक बैठक में भाग लेना है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को आश्वासन दिया कि मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी। उन्होंने वकीलों से मंगलवार को बहस में लगने वाला अनुमानित समय बताने को कहा।याचिकाकर्ता संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से मसौदा सूची की अधिसूचना रोकने का आग्रह करते हुए कहा, इससे करीब 4.5 करोड़ मतदाताओं को असुविधा होगी। मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद बाहर रह जाने वाले लोगों को आपत्तियां दर्ज करने और नाम शामिल करने के लिए कदम उठाने होंगे। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, पिछली सुनवाई में इस पर रोक लगाने की मांग नहीं की गई थी। शंकरनारायणन ने कहा कि 10 जुलाई को रोक लगाने की प्रार्थना नहीं की गई थी, क्योंकि अदालत मसौदा प्रकाशन की तारीख से पहले सुनवाई के लिए सहमत हो गया था।
