नई दिल्ली। जीएसटी दरों में कटौती 22 सितंबर से लागू होने के बाद कीमतें घटने के इंतजार में लोग कारों की खरीदारी टाल रहे हैं। बैंक से मंजूर कार लोन भी रद्द करा रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद कारों के दाम घटेंगे, जिससे उन्हें कम कर्ज लेना पड़ेगा।
एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 22 सितंबर तक जिन ग्राहकों का कार लोन स्वीकृत हो चुका था, वे उसे रद्द कराने के लिए संबंधित शाखा से संपर्क कर रहे हैं। जीएसटी सुधार के बाद मिलने वाले लाभकी तुलना में लोन रद्द कराने का शुल्क बहुत कम है। ऐसे में उधारकर्ता नए सिरे से लोन प्रक्रिया का विकल्प चुन रहे हैं।
उधर, कई बैंकों ने मानसून में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऑटो और होम लोन पर अपने प्रसंस्करण शुल्क माफ कर दिए हैं। इसके बावजूद ग्राहक अपने मंजूर लोन रद्द करा रहे हैं, जिसने बैंकों की चिंता
बढ़ा दी है। जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में 1,200 सीसी तक की कारों पर कर दर को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है।सरकार के जीएसटी दरों में कमी और आयकर छूट से अर्थव्यवस्था में कुल 3.50 लाख करोड़ रुपये की मांग बढ़ सकती है। इन सुधारों के जरिये 7 से 7.50 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करना संभव हो सकेगा। अर्थशास्त्रियों को कहना है कि नीति-निर्माताओं को अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन की रफ्तार तेज करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र पर ध्यान देनी होगी। इसके लिए अन्य क्षेत्रों में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। विशेष रूप से भूमि और श्रम क्षेत्र में। मद्रास स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के निदेशक एनआर भानुमूर्ति ने कहा, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों में किसी भी कर का गुणक ऋणात्मक होता है। यानी जितना अधिक कर होगा, उत्पादन उतना ही कम होगा। ऐसे में, सुधारों से करों का बोझ घटेगा, जिससे आर्थिक वृद्धि की क्षमता 7 से 7.5 फीसदी तक बढ़ सकती है।
