प्रयागराज। रमजान के महीने में अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देता है और दोजख के दरवाजे को बंद कर देता है। इसी महीने में अल्लाह ने पवित्र कुरआन नाजिल किया है। इसी किताब में अल्लाह ने जिंदगी गुजर-बसर करने के तरीके बताए हैं। इसीलिए इस महीने में कुरआन की तिलावत का खास महत्व है।
यह बात शनिवार की देर रात हरवारा की लोहा शाह मस्जिद में कुरआन के मुकम्मसल होने पर मौलाना इकरामुल हक अजहरी ने अपने तकरीर में कही। उन्होंने कहा कि तरावीह कि नमाज सुन्नते मुअक्केदा है, जो हर इंसान के लिए जरूरी है। जो रमजान का चांद देखकर शुरू होता है और ईद का चांद दिखने से पहले तक जारी रहता है। कुरआन के मुकम्मल होने के बाद भी तरावीह की नमाज पढ़ा जाना उतना ही जरूरी है जितना कि मुकम्मल होने से पहले था।
तरावीह की नमाज के दौरान आठ दिन में हाफिज मोहम्मद अकरम ने कुरआन मुकम्मल किया। अपनी तकरीर में मौलाना ने कहा कि जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं। उनके लिए रमजान के महीने में फितरा देना जरूरी है। इस साल शहर के प्रत्येक व्यक्ति पर फितरा 70 रुपये और ग्रामीण इलाके में प्रत्येक व्यक्ति पर 60 रुपये निर्धारित किया गया है।
रमजान के महीने में ही जकात निकाला जाता है, जिन लोगों की सालाना बचत साढ़े सात तीला सीना या साढ़े 52 तोला चांदी के मूल्य के बराबर या इससे अधिक रकम है, उन्हें सालाना ढाई प्रतिशत जकात देना फर्ज है।
इस दौरान सुरैया नाज, मोहम्मद अयान, हाफिज रिजवान, मौरताना शिबली, हाफिज तौहीद, मौलाना इरफान आदि बच्चों ने भी नात पढ़ा। शकील अहमद, मोइनुद्दीन, मोहम्मद अली, राजू, मोहम्मद ईशान, मोहम्मद ताज, मोहम्मद राज, वकार अहमद, मोहम्मद फैसल, शानू, मोहम्मद अहद, मोहम्मद आसिफ आदि मौजूद रहे
