प्रयागराज। वर्तमान समय की मांग एक राष्ट्र-एक चुनाव है। अलग-अलग चुनावों से देश के संसाधनों का अनावश्यक दोहन होता है। ये बातें उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कृष्ण मुरारी ने एक राष्ट्र-एक चुनाव विषय पर संगोष्ठी में कहीं। इस दौरान सर्वसम्मति से एक राष्ट्र-एक चुनाव पर सहमति भी जताई गई।
न्यायमूर्ति शंभूनाथ श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश एडवोकेट फोरम की ओर से स्टेनली रोड स्थित इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन हॉल में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी ने कहा, अपना लोकतंत्र संवाद की नींव पर खड़ा है।
इसलिए इस पर संवाद से ही फैसला लिया जाना चाहिए। लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में विशाल संसाधन की आवश्यकता पड़ती है।
इसमें मानवीय संसाधन, सुरक्षा संसाधन एवं आर्थिक संसाधन शामिल हैं। चुनाव में शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं। इससे शैक्षिक कार्य प्रभावित होता है। सरकारों को भी नीतिगत निर्णय लेने में व्यवधान उत्पन्नो है। अगर एक साथ चुनाव होते हैं तो सरकार चुनावी मोड़ से हटकर नीतिगत निर्णय ले सकती है। इस मामले में सभी दलों को मिलकर सहयोग देना होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शंभूनाथ श्रीवास्तव ने कहा, एक राष्ट्र-एक चुनाव समय की मांग है। अब उचित समय है कि हम सब एक राष्ट्रीय चुनाव का समर्थन करें। उत्तर प्रदेश एडवोकेट फोरम के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने कहा, पूर्व में सभी चुनाव एक साथ ही आयोजित होते थे। लेकिन, 1969 में लोकसभा भंग कर दी गई। उसके बाद एक साथ चुनाव का क्रम भंग हो गया।
1983 में पहली बार निर्वाचन आयोग ने एक साथ चुनाव करने की वकालत की। 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने जनता से सुझाव लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उत्तर प्रदेश एडवोकेट फोरम के महामंत्री अखिलेश कुमार अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन मुख्य स्थायी अधिवक्ता शीतला प्रसाद गौड़ शीतल ने किया।
इस दौरान अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी, न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी, न्यायमूर्ति रणविजय सिंह, न्यायमूर्ति अशोक कुमार, अपर सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी, सहायक सॉलिसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला रहे।
