संगमनगरी में पारा 40 के पार जा चुका पर, एसआरएन में गर्मी के इंतजाम ठंडे हैं। ट्रॉमा वन, ट्रॉमा ट्रायज, ट्रॉमा वार्ड टू, ट्रॉमा आईसीयू, ट्रॉमा इमरजेंसी ओटी, इमरजेंसी मेडिसिन, इमरजेंसी सर्जरी और हृदय रोग विभाग का एसी खराब है। ऑर्थोपेडिक, एचडीयू, एमआईसीयू, ईएनटी, पल्मोनरी विभाग सहित अन्य वार्डों में 40 फीसदी पंखे पूरी तरह से बंद हैं।
इसके अलावा 20 फीसदी पंखे इतनी धीमी गति से चल रहे हैं कि मरीज तक हवा नहीं पहुंच पा रही है। वहीं, अस्पताल प्रशासन कह रहा है कि बस हल्की-फुल्की समस्याएं हैं।
हर साल गर्मी शुरू होने से पहले एसआरएन में पंखे-एसी की मरम्मत व इनके टेंडर प्रक्रिया फरवरी-मार्च – में पूरी कर ली जाती है। इस बार अप्रैल आधा बीत चुका है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि आठ अप्रैल को टेंडर खुल क चुका है।
अस्पताल में कहीं-कहीं पर एसी खराब हैं, बाकी व्यवस्थाएं ठीक हैं। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। आठ अप्रैल को टेंडर खुल गया था, अवकाश के कारण प्रक्रिया पूरी हो नहीं सका। जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी करके काम शुरू कर दिया जाएगा। – डॉ. वत्सला मिश्रा, प्राचार्य एमएलएन मेडिकल कॉलेज अवकाश की वजह से तीन से चार दिन काम पीछे हुआ है। इस वर्ष गर्मी की शुरुआत मार्च से हो गई है। कई ऐसे मौके आए, जब फीसदी पंखे इतनी धीमी गति से से चल रहे हैं कि मरीज तक नहीं पहुंच पा रही है हवा स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के वार्ड में गर्मी से परेशान मरीज। अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे में बेड पर मरीज के लिए गर्मी किसी आफत से कम नहीं है।
वहीं, मरीज करें भी तो क्या करें। क्योंकि, उन्हें डर है कि आवाज उठाएंगे तो उन्हें अस्पताल प्रशासन बाहर का रास्ता दिखा देगा। ऐसे में वह खुलकर बोल भी नहीं पा रहे हैं।
