पेरिस। इस्राइल के साथ 12 दिन चली जंग के शुरुआती दौर में ही ईरान के कम से कम 14 वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। अब ऐसी बातें सामने आ रही हैं कि इन वैज्ञानिकों को ईरान की एटमी ताकत बढ़ाने की कोशिशों का नतीजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ा है। इस्राइल का मानना है कि अब कोई भी वैज्ञानिक भविष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम का हिस्सा बनने से पहले सौ बार सोचेगा।
फ्रांस में इस्त्राइल के राजदूत जोशुआ जर्का ने एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान का मुख्य लक्ष्य उसके एटमी कार्यक्रम और उसे आगे बढ़ाने वाले प्रमुख लोगों को खत्म करना था। यही वजह है कि सबसे पहले वरिष्ठ ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया गया। जर्का ने कहा कि वे इसलिए नहीं मारे गए क्योंकि भौतिकी जानते थे। बल्कि इसलिए मारे गए क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर लड़ाई में शामिल थे, जिसमें परमाणु हथियारों का निर्माण और उत्पादन शामिल था।
जर्का ने कहा कि शीर्ष वैज्ञानिकों के पूरे समूह का सफाया करके इस्राइल अपने लक्ष्य में सफल रहा है क्योंकि उसने एटमी क्षेत्र में ईरान की प्रगति को वर्षों पीछे धकेल दिया है। अब शायद ही कोई परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाने की योजना का हिस्सा बनना चाहेगा। इस्त्राइल का कहना है कि उसने वैज्ञानिकों की ऐसी पूरीपीढ़ी का सफाया कर दिया है जिनके पास भौतिकी, रसायन, विस्फोटक विज्ञान और और इंजीनियरिंग का दशकों का संचित अनुभव था। इस्राइल का दावा है कि मारे गए वैज्ञानिक सक्रिय रूप से बम बनाने का काम कर रहे थे।
