गोरखपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि योग आधारित पुरातन जीवन पद्धति ही श्रेष्ठ थी। उस वक्त लोग 200-300 वर्षों तक निरोग रहकर जीते थे। आयुर्वेद पर आधारित प्राचीन जीवनशैली में दिनचर्या, ऋतुचर्या और रात्रिचर्या पर बहुत ध्यान दिया जाता है। आज होम्योपैथ समेत आयुष चिकित्सा से जुड़ीं अन्य विधियों को भी भारत में अधिक महत्व दिया जा रहा है। किसान और आदिवासी समाज के लोग तो शारीरिक श्रम करते हैं, लेकिन ऑफिस जाने वालों के लिए योग बहुत जरूरी है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को भटहट ब्लॉक के पिपरी गांव में बने प्रदेश के पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का लोकार्पण करने के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित कर रही थीं। 52 एकड़ में बने इस विश्वविद्यालय के निर्माण पर 268 करोड़ की लागत आई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत योगियों-ऋषियों की भूमि है। योगी 400 साल तक जीते थे। शरीर को बिना थके काम करने और नींद पर नियंत्रण पाने वाला बनाने के लिएयोग को अपनाना होगा। जनप्रतिनिधि इसका पालन करके ही हर वक्त जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं। राष्ट्रपति ने स्वस्थ रहने के लिए हितभुक, ऋतभुक व मितभुक की – चर्चा की। कहा कि संसाधन व सुविधाओं का उपयोग जीवन को बेहतर बनाने के लिए करें।
उत्तम स्वास्थ्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऑफिस में कार्य करने और कम शारीरिक श्रम करने वालों के लिए योग अत्यंत आवश्यक है। आयुर्वेद धरती से जुड़ा है। खेतों व जंगलों में औषधियों, वनस्पतियों व जड़ी-बूटियों का खजाना आज भी मौजूद है। अरिष्ट व आसव औषधियोंकी कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। राष्ट्रपति ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की सर्वसमावेशी व उपयोगी दृष्टि के आधार पर हमने विदेश में उत्पन्न हुई चिकित्सा पद्धतियों को भी आयुष पद्धतियों में शामिल किया है। आज यूनान और मध्य एशिया के देशों में यूनानी चिकित्सा पद्धति का उतना उपयोग नहीं होता, जितना भारत में होता है। जर्मनी में विकसित हुई होम्योपैथिक चिकित्सा को हमारे देश ने पूरी तरह अपना लिया है।
उन्होंने कहा कि 2014 में केंद्र और 2017 से यपी सरकार ने आयुष विभागों की स्थापना करके देशविदेश की इन सभी उपयोगी पद्धतियों को नई ऊर्जा के साथ प्रोत्साहित किया है।
ये रहे मौजूद : आयुष विश्वविद्यालय के लोकार्पण समारोह को आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र दयालु ने भी संबोधित किया। स्वागत संबोधन आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के. रामचंद्र रेड्डी ने किया। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, सांसद रविकिशन शुक्ल, स्थानीय विधायक महेंद्र पाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
