पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में जरूरत पड़ने पर ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को तीन साल के अनुभव वाले अतिरिक्त सिविल जजों को तैनात करने और जरूरत पड़ने पर झारखंड व उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की सहायता लेने की अनुमति दी, ताकि एसआईआर के तहत आपत्तियों के सत्यापन के लिए पर्याप्त न्यायिक अधिकारी उपलब्ध हो सके ।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह निर्देश तब दिए, जब कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से समयसीमा के भीतर तार्किक विसंगति श्रेणी के तहत 50 लाख से अधिक आपत्तियों के सत्यापन के लिए अधिकारियों की कमी का मुद्दा उठाया गया। हाईकोर्ट ने कहा, 250 न्यायिक अधिकारियों को भी यह सत्यापन पूरा करने में लगभग 80 दिन लगेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया, पहले से नियुक्त अधिकारियों के अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट तीन वर्ष के अनुभव वाले सिविल जजों को तैनात कर सकता है। इसके बाद भी यदि अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत हो, तो कलकत्ता हाईकोर्ट के हाईकोर्ट से सेवारत या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश झारखंड एवं उड़ीसा न्यायिक अधिकारी मांगने के लिए अनुरोध कर सकते हैं।
अनुच्छेद 142 की शक्ति का किया इस्तेमाल : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल की एसआईआर प्रक्रिया में जिला न्यायाधीशों को शामिल करने का आदेश दिया था। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, हमारे पास कलकत्ता हाईकोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करने व जिला न्यायाधीशों को प्रतिनियुक्त कर लंबित मतदाता दावों का निपटारा करने का अनुरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
चुनाव आयोग वहन करेगा खर्च : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इन अधिकारियों के यात्रा, आवास और मानदेय सहित सभी खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा। उड़ीसा एवं झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध है कि वे कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के किसी भी अनुरोध पर विचार करें। पीठ ने न्यायिक मानव संसाधन में यह विस्तार अगले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संबंधी आपत्तियों का समय पर और पूर्ण सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए किया है l
