पर्वतमाला की सुरक्षा को लेकर सोमवार को कांग्रेस की राजस्थान इकाई और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। इस बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने फिर साफ किया है कि पर्वत श्रृंखला का 90% से ज्यादा हिस्सा खनन से संरक्षित है। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नियमों को सख्त बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से केंद्र को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को स्वीकारने के बाद सेव अरावली अभियान शुरू होने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिभाषा अवैध खनन को रोकने के इरादे से तैयार की गई है।
खनन गतिविधि केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र में ही करने की अनुमति होगी, जो एक प्रतिशत से भी कम है। उस क्षेत्र में भी कोई नई खदानें नहीं खोली गई हैं। उन्होंने कहा, खनन प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है। अरावली श्रृंखला में मुख्य समस्या अवैध खनन है। इस पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त प्रावधानों वाली एक व्यापक परिभाषा दी है, जिसकी समीक्षा अभी लंबित है।
पर्यावरण मंत्री ने संव अरावली आंदोलन पर कहा कि लोगों के बीच भ्रम नहीं फैलाया जाना चाहिए। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं है जिसे छिपाया जा रहा हो। फिर भी अगर किसी को ऐसा लगता है तो हमें बताए। या फिर कोर्ट में जाकर अपनी बात रखे।
एनसीआर में खनन की अनुमति ही नहीं.. पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पहले ऐसा होता था कि किसी भी जगह खनन होता था, लेकिन यह तय नहीं था कि अरावली पहाड़ी या अरावली क्या है। उन्होंने कहा, सबसे पहले में स्पष्ट कर दूं, एनसीआर क्षेत्र यानी दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूहं और अलवर का एनसीआर वाले हिस्से में खनन की अनुमति ही नहीं है तो फिर ऐसे दावे तथ्यात्मक रूप से झूठे ही हैं ।
