इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्धार्थ नगर में अवैध बेदखली के एक मामले में नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने कार्रवाई के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को अनुचित बताया और राज्य की प्रशासनिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग करार देते हुए प्रतिवादी पेशकार पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है ।
वहीं, डीएम और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 48 घंटे में पीड़िता को घर पर कब्जा दिलाएं। याचिकाकर्ता सोनी के ससुर की मौत के बाद पति और देवर ने घर का एक हिस्सा संदीप गुप्ता (जो कोर्ट में पेशकार है) को बेच दिया था पर संपत्ति का कोई कानूनी बंटवारा नहीं हुआ था।
आरोप है कि इसके बावजूद संदीप ने अपने प्रभाव से पुलिस-राजस्व टीम के साथ मिलकर 18 जुलाई 2025 को याचिकाकर्ता और उसके तीन बच्चों को जबरन घर से निकाल दिया। इस बेदखली के खिलाफ सोनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याची के अधिवक्ता ने दलील कि ट्रायल कोर्ट ने संदीप के पक्ष में कब्जा बहाली के लिए दायर आवेदन को बिना किसी नोटिस के उसी दिन स्वीकार कर लिया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। प्रतिवादी पेशकार के प्रभाव में आकर विवादित आदेश पारित किया गया। वहीं, प्रतिवादी, के अधिवक्ता ने दलील दी कि मकान के सह-स्वामियों से पंजीकृत बैनामा के तहत मकान खरीदा गया था और उसी समय उसे कब्जा दे दिया गया था। उसने ट्रायल कोर्ट के आदेश के पालन में कब्जा लिया है ।
खण्डपीठ ने दोन पक्षों को सुनने के बाद पाया कि प्रशासनिक अधिकारियों खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के पास किसी को घर से बेदखल करने के लिए संयुक्त टीम बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। कोर्ट ने संदीप पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह राशि याचिकाकर्ता को अवैध बेदखली और मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में एक सप्ताह के भीतर देनी होगी। साथ हो कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की ओर से बिना किसी ठोस सबूत के जल्दबाजी में अंतरिम स्थगन आदेश पारित करने पर नाराजगी जताई है। वहीं, मुख्य न्यायाधीश से संबंधित जज के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू करने पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है।
