नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपातकाल लगाने वालों ने न सिर्फ देश के संविधान की हत्या की बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को अपना गुलाम बनाए रखने का भी था। इस दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को प्रताड़ित किया गया। अभिव्यक्ति की आजादी का भी गला घोंट दिया गया। लेकिन जनता-जनार्दन के सामर्थ्य के आगे आखिरकार आपातकाल लगाने वालों की हार हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में कहा कि देश पर आपातकाल थोपे जाने के 50 वर्ष कुछ दिन पहले ही पूरे हुए हैं। सभी देशवासियों ने संविधान हत्या दिवस मनाया है। हमें हमेशा उन सभी लोगों को याद करना चाहिए, जिन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया था। इससे हमें अपने संविधान को सशक्त बनाए रखने के लिए निरंतर सजग रहने की प्रेरणा मिलती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जन-भागीदारी की शक्ति से बड़े से बड़े संकटों का मुकाबला किया जा सकता है।
अपने कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्रियों मोराजजी देसाई और अटल बिहारी के अलावा बाबू जगजीवन राम के भाषणों की कुछ ऑडियो क्लिप सुनाई। प्रधानमंत्री ने कहा, इससे आपको उस दौर की भयावहता का अंदाजा लगेगा। इन्हें सुनकर आप कल्पना कर सकते हैं कि वो दौर कैसा था। पीएम ने कहा, लोगों को प्रताड़ित करने के ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। जॉर्ज फर्नाडिस साहब को जंजीरों में बांधा गया था। मीसा के तहत किसी को भी गिरफ्तार कर लिया जाता था। छात्रों को भी परेशान किया गया।
