इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रक हादसे में पैर गंवाने वाले को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति बढ़ाकर न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और अन्य को निर्देश दिया है कि वह सात प्रतिशत ब्याज के साथ 15 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करे। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने पीड़ित संगमलाल की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।कोर्ट ने कहा है कि स्थायी अक्षमता के मामलों में, भविष्य की संभावनाओं के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए।
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 173 के तहत ट्रक मालिक के खिलाफ क्षतिपूर्ति का दावा किया गया। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक संख्या एमएच 04-डीके 4585 के बीमाकर्ता को 15 जनवरी 2015 को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण/अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, न्यायालय संख्या एक इलाहाबाद ने आदेश दिया कि लगी चोटों के लिए दावेदार को 5,03,310 रुपये का मुआवजा, सात प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित जाए। इसकी भरपाई बीमाकर्ता को करने का आदेश था। इस निर्णय व अवार्ड के विरुद्ध याची ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। बीमा कंपनी ने भी अवार्ड के खिलाफ अपील दायर की थी। बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी थी, जबकि याची ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा है कि याची को कुल 16,59,510 रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए और इसका भुगतान दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक के बीमाकर्ता को करना चाहिए। बीमा कंपनी को बढ़ा हुआ मुआवजा दो महीने के भीतर जमा करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा है कि यदि कंपनी ने पहले ही कोई राशि जमा की है तो वह उसे समायोजित कर सकती है।
कोर्ट ने कहा,याची का दाहिना पैर घुटने से ऊपर काट दिया गया था, जिससे वह अपना काम नहीं कर सकता है। यह उसकी कार्यात्मक अक्षमता है। ट्रिब्यूनल ने कमाई क्षमता के नुकसान को 100 प्रतिशत माना है जो सही है। सीएमओ प्रतापगढ़ ने 60 प्रतिशत स्थायी अक्षमता का प्रमाण पत्र दिया है इसे बीमा कंपनी ने चुनौती नहीं दी है। फिजियोथेरेपी विभाग, बीवाईएल नायर चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड टीएनएम कॉलेज, बॉम्बे के प्रमाण पत्र में 80 प्रतिशत स्थायी अक्षमता मानी गई है।
