सिविल लाइन थाना सोमवार को उस वक्त अफरातफरी का केंद्र बन गया जब बार काउंसिल सदस्य पद की एक महिला प्रत्याशी ने अपने विरोधी प्रत्याशी पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए आत्मदाह करने का प्रयास किया। महिला अधिवक्ता आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर महिला कोतवाली पहुंची थी ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला का कहना था कि जब तक आरोपी प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक वह थाने से नहीं हटेंगी। इसी दौरान वह हाथ में माचिस और ज्वलनशील पदार्थ लेकर थाने के भीतर बैठ गईं और आत्मदाह का संकेत दिया।
स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब पुलिस कर्मियों ने महिला को आत्मदाह के लिए तैयार अवस्था में देखा। अचानक बने हालात से थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मी घबरा गए। हालांकि तत्काल कार्रवाई करते हुए महिला से माचिस और ज्वलनशील पदार्थ हटवाया गया और उसे सुरक्षित तरीके से थाना परिसर में बैठा लिया गया।
फिलहाल महिला सुरक्षित है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और प्राप्त तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
विश्लेषण : यह घटना केवल एक व्यक्तिगत आरोप या चुनावी टकराव का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि जब एक अधिवक्ता और प्रत्याशी को एफआईआर दर्ज कराने के लिए इस हद तक जाना पड़े, तो शिकायत निवारण प्रणाली कितनी प्रभावी है। आत्मदाह जैसे कदम को जायज नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यह जरूर स्पष्ट करता है कि शिकायतकर्ता खुद को किस स्तर तक असहाय महसूस कर रही थी। अब असली परीक्षा पुलिस की है कि वह आरोपों की निष्पक्ष जांच करती है या मामला केवल “स्थिति संभालने” तक सीमित रह जाता है।
