शिमला/देहरादून/नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में सोमवार रात 17 जगह बादल फटने से भारी तबाही हुई। मंडी जिले में ही 15 जगह बादल फटे और सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। प्रदेश में 18 लोगों की मौत हो गई, 33 अभी लापता हैं। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। मंडी में 24 घर और 12 गोशालाएं जमींदोज हो गईं। कई जगह फंसे 332 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। कुकलाह के पास 16 मेगावाट का पटीकरी विद्युत प्रोजेक्ट बह गया। कई पुल ध्वस्त हो गए हैं। उत्तराखंड में भी भारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऋषिकेश में गंगा उफान पर है। मुनि की रेती व लक्ष्मण झूला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।
हिमाचल में कुल्लू के आनी बैहना के पास बादल फटने से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया। किन्नौर में भी बादल फटा। मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया, सोमवार शाम से 216.8 मिमी वर्षा हुई है। अकेलेमंडी जिले में ही 14 लोगों की जान गई है। गोहर, करसोग व धर्मक्षेत्र में बादल फटने और बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। उफनाती ब्यास नदी का पानी मंडी शहर में भी घुस गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल व राज्य आपदा मोचन बल राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। लापता लोगों में स्यांज के दो परिवारों के नौ लोग भी शामिल हैं। सभी नदियां और नाले उफान पर हैं। सतलुज नदी के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हादसों में 30 पशुओं की भी मौत हो गई। ब्यास नदी पर पंडोह बांध से 1.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने से स्थिति और गंभीर हो गई और घरों में पानी घुस गया है।
