केंद्रीय बजट में डिजिटल पेशेवरों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग करने वालों की मानसिक सेहत पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब उनका अपना ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवतार परामर्श देगा। आईआईटी में विकसित यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त अवतार एप हैलट स्थित मनोरोग विभाग में स्थापित किया जाएगा।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में इंटरनेट सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें डिजिटल प्रोफेशनल, कंटेंट क्रिएटर्स के साथ-साथ रात भर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले युवा भी शामिल हैं। 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग रोगियों की संख्या सबसे अधिक है। विभाग की एडोलेसेंट क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे रोगी मतिभ्रम और भ्रम के शिकार हो रहे हैं। साथ ही उनमें अवसाद और चिंता का स्तर भी बढ़ा हुआ है।
केंद्रीय बजट में डिजिटल रूप से सक्रिय व्यक्तियों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया के आदी लोगों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, विशेषकर 15 से 24 वर्ष के आयु वर्ग पर। आईआईटी ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर यह विशेष अवतार एप तैयार किया है। यह एप विभाग के परामर्श कक्ष रोगी इस कक्ष में अकेला होगा तो कंप्यूटर में कंप्यूटर पर उपलब्ध रहेगा। जब कोई स्क्रीन पर उसका अपना चेहरा दिखाई देगा और अवतार उससे बातचीत करेगा। यह अवतार रोगी से सवाल पूछेगा, सुझाव ‘देगा और बातचीत के दौरान रोगी के अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक मनोभावों का विश्लेषण करेगा। इससे रोगी समस्याओं को समझने में मदद मिलेगी। कंप्यूटर पर दिखने वाला यह अवतार हाव-भाव की नकल करने में भी माहिर होगा जिससे रोगी खुलकर अपनी बात कह सकेगा।
