तियानजित। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मौजूदा वैश्विक स्थिति में भारत-चीन की दोस्ती को मही विकल्प बताते हुए सोमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान पर काम करने पर सहमति जताई।एससीओं शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक करीब 50 मिनट चली। दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार की स्थिरता में दोनों देशों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों का आगे बढ़ाने का संकल्प भी जताया। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा रखा है। द्विपक्षीय व्यापार-निवेश के संकल्प को ट्रंप को कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक के दौरान जिनपिंग ने ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए। मोदी-जिनपिंग के बीच करीब 10 महीने बाद हुई यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि व्यापार और टैरिफ संबंधी अमेरिकी नीतियों के कारण भारत-अमेरिका रिश्तों में गिरावट आई है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के महत्व को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने जिनपिंग को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार करने के साथ व्यापार घाटे को कम करने का संकल्प लिया। इसके लिए राजनीतिक व रणनीतिक दिशा से आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया गया। गौरतलब है कि व्यापार घाटा बीजिंग के पक्ष में झुका है, जो बढ़कर 99.2 अरब डॉलर पहुंच चुका है।पीएम मोदी ने आतंकवाद को वैश्विक मुद्दा बताया और इसके खिलाफ लड़ाई में चीन का सहयोग भी मांगा। बैठक में तय किया गया कि आतंकवाद और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था जैसे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों को बहुपक्षीय मंचों तक विस्तारित करने के लिए दोनों देश साझा आधार पर काम करेंगे।
