भारतीय रेलवे का स्लोगन सुरक्षा संरक्षा,और समय बना मजाक…
चलती ट्रेन में भगवान भरोसे ही है यात्री
भारतीय रेलवे द्वारा दिया गया ये स्लोगन सुरक्षा संरक्षा और समय अब सिर्फ स्लोगन के लिए ही बचा है ताजा मामला 31 अगस्त का है जब प्रयागराज की लूकरगंज निवासिनी श्रीमती श्वेता जैसवाल अपनी बहन के साथ चौरी चौरा स्टेशन से ट्रेन न 15004 चौरी चौरा एक्सप्रेस के ए 1 कोच में प्रयागराज के लिए बैठी ट्रेन जैसे ही वाराणसी के कैंट स्टेशन पहुंची अटेंड के भेष में पहुंचे युवकों ने जबरदस्ती श्वेता जैसवाल के पर्स को छीनने लगे श्वेता ने जब इसका विरोध किया तो बदमाशों ने उन्हें धक्का दे कर गिरा दिया और पर्स छीन के चलती ट्रेन से कूद कर रफूचक्कर हो गए घटना के तुरंत बाद श्वेता ने ट्रेन रोकने की कोशिश की लेकिन वहां पहुंचे अन्य अटेंडरों ने उन्हें जंजीर तक नहीं खींचने दिया जिससे ये स्पष्ट अंदेशा लगाया जा सकता है कि इस लूट में कहीं न कहीं अन्य कोच सहायकों की भी संलिप्तता भी है। बड़ा और अहम सवाल ये है कि सेकेंड ए सी जैसे कोच में इतनी लंबी ट्रेन में भी बदमाशों के हौसले इस कदर बुलंद है कि वो किसी भी वारदात को अंजाम देने से हिचक नहीं रहे है और बेखौफ हो कर लूट की घटनाओं को अंजाम दे रहे है। श्वेता जैसवाल की माने तो ट्रेन के गंतव्य से रवाना होने से लेकर घटना के वक्त तक ना तो उनका टिकट चेक हुआ था न कि कोई रेलवे की पुलिस गश्त करती दिखी। ऐसे ने बड़ा सवालिया निशान रेलवे के ऊपर भी है आखिर यात्रियों की सुरक्षा की इतनी बड़ी बड़ी बाते करने के बाद भी ए सी जैसे कोच में ऐसी घटनाएं होती है तो सुरक्षा के लिए ट्रेन में चलने वाले जवान क्या सोने में व्यस्त रहते है या उनकी भी मिली भगत से ऐसी घटनाएं होती है ये अवश्य एक जांच का विषय है। फिलहाल प्रयागराज पहुंच कर श्वेता ने जी आर पी प्रयागराज में इसकी शिकायत भी दर्ज करा दी है। बदमाशों द्वारा लूटे गए पर्स में 15 हजार नकद ए टी एम कार्ड और अन्य जरूरी कागजात थे
