देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन फरवरी में जींद-सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच फरवरी में फर्राटा भरेगी। यह दुनिया की सबसे लंबी और ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन है। जींद पहुंच चुकी ट्रेन के साथ ट्रैक और हाइड्रोजन प्लांट की टेस्टिंग की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसे हरी झंडी दिखाए जाने की संभावना है।
हाइड्रोजन सेल आधारित 35 ट्रेनों के बेड़े को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने 2023-24 में 2800 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) ने डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (डेमू) को हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में ढालकर यह पहली ट्रेन तैयार की है। इसके कोच इंटीग्रल रेल कोच फैक्टरी चेन्नई ने बनाए हैं। इस कामयाबी के बाद भारत दुनिया में फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, यूके, चीन, अमेरिका जैसे हाइड्रोजन ट्रेनों से समृद्ध देशों में शुमार हो गया है।
140 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार क्षमता वाली यह ट्रेन पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से पैदा हुई बिजली से यह संचालित होगी। इसमें धुएं की जगह सिर्फ भाप (वाष्प) का ही उत्सर्जन होगा। आठ कोच वाली दुनिया की सबसे लंबी यह ट्रेन एक बार में 2500 यात्री ले जा सकेगी। ट्रेन के दरवाजे स्वचालित होंगे l
ट्रेन में है खास सुविधाएं : बिना आवाज के चलेगी यात्री आरामदायक सफर कर सकेंगे । हाइड्रोजन ट्रेन के दोनों छोर पर पावर इंजन लगे हैं । यात्रियों के बैठने के लिए 8 डिब्बे लगाए गए हैं । यात्रियों को सफर के दौरान पंखे लाइट और ऐसी की सुविधा मिलेगी । मेट्रो की तरह कोच के दोनों तरफ प्रवेश और निकासी के लिए दो-दो दरवाजे हैं । हर कोच में डिस्प्ले होगी जिसे स्टेशन आने के बारे में सूचना प्रसारित होगी |
