कभी बासमती चावल की खुशबू के लिए मशहूर रही बिजनौर की धरती अब लोगों की जुबां पर गुड़ की मिठास घोल रही है। जनपद में खासकर नांगल सोती क्षेत्र के कोल्हुओं पर बना गुड़ भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा जर्मनी और कनाडा तक पहुंच रहा है। इसकी पहचान किसी ब्रांड से नहीं बल्कि नांगलसोती गांव के नाम से है। इसके अलावा अफजलगढ़ और रेहड़ इलाके में बनने वाले गुंड़ की मांग उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में सर्वाधिक रहती है।
‘नांगलसोती क्षेत्र में प्रतिवर्ष 30 से अधिक कोल्हुओं का संचालन किया जाता है, जिन पर प्रतिदिन करीब पांच हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर 500 से 600 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है। कोल्हू स्वामी राजवीर काकरान, नितिन, अनमोल, ओमवीर, मोनू ने बताया कि यहां क्षेत्र के कुशल कारीगरों द्वारा गुड़ तैयार किया जाता है। यह गुड़ मिठास और छोटे आकार के लिए जिले सहित दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड में भी सप्लाई होता है। दूर दराज से लोग कोल्हुओं पर गुड़ खरीदने पहुंचते हैं। किरतपुर के कई कारोबारी रोजाना नांगल से करीब 100 क्विंटल गुड़ खरीद कर राजस्थान, गुजरात, हरियाणा पहुंचाते हैं। हाल ही में हरियाणा के एक कारोबारी डेढ़ क्विंटल गुड़ खरीद कर ले गए हैं। नांगल क्षेत्र के गुड़ को जर्मनी, कनाडा, हॉलैंड और दुबई में रहने वाले लोग भी पसंद कर रहे हैं।
बिजनौर निवासी मनोज राजपूत अपने जर्मनी में रहने वाले रिश्तेदार चकित राजपूत के यहां प्रतिवर्ष गुड़ पहुंचाते हैं। मनोज राजपूत ने बताया कि करीब 10 किलोग्राम नांगल के कोल्हू का गुड़ ले जाते हैं। उधर, बिजनौर में एसबीआई के पूर्व अधिकारी सुनील चौधरी जर्मनी में बेटी इला सिंह और अमेरिका में बेटे सोहेल सिंह के लिए करीब 10-10 किलोग्राम गुड़ पहुंचाते हैं। जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि गुड़ की गुणवत्ता भोगोलिक स्थिति, फसल में कीटनाशक और रसायन के कम प्रयोग पर निर्भर करती है।
