प्रयागराज। बढ़ते प्रदूषण, धूम्रपान और खराब जीवनशैली के कारण फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), आईएलडी, अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों के लिए सांस लेना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन एक ऐसा उपचार है जो इन मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह बातें रविवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के कन्वेंशन सेंटर में वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियनडॉ. गौरव अग्रवाल ने पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन- बियॉन्ड मेडिकेशन विषय पर व्याख्या देते हुए कहीं।
डॉ. गौरव अग्रवाल ने बताया कि यह उपचार व्यायाम, श्वसन तकनीक, आहार और मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मरीजों की सांस लेने की क्षमता को बढ़ाना और ऊर्जा के स्तर में सुधार करना है। यह खासकर उन लोगों के लिए जीवन रक्षक हो सकता है, जिन्हें सांस की समस्याओं के कारण बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है।
