आस्था और सनातन सभ्यता का महापर्व महाकुंभ 2081संवत् का आयोजन महाशिवरात्रि के अमृत स्नान के साथ समाप्त हो गया। इस महापर्व की समाप्ति के बाद सभी स्नानार्थियों ने मोक्षदायिनी मां गंगा को प्रणाम कर अपने निर्धारित गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हुए आगामी 2031 में होने वाले अर्द्ध कुंभ में वापस आने का संकल्प भी लिया।
जहां कल्पवासियों ने अपने और अपने परिवार के लिए सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा तो वही इस महा आयोजन में कई कीर्तिमान स्थापित हुए।
* 66.31 करोड़ सनातनियों द्वारा इस महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाई।
* विश्व के सबसे बड़े सफाई कार्यों का संपादन इस महा आयोजन का हिस्सा भी बना।
* लगभग 26.34 हजार के लगभग मिक्ट्रिक टन के खाद्यान्न प्रसाद के रूप में वितरित किया गया जो कि अपनेआप में रिकॉर्ड है।
* 66 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों ने 55 दिनों(पाली क्रम के अनुसार) तक महाकुंभ में कार्यरत रहे।
* पूरे महाकुंभ के दौरान देश विदेश के कुल 3457 राजनयिकों के द्वारा आस्था की डुबकी लगाई गई।
* उड्डयन विभाग ने कुल 576(निजी,सरकारी एवम् रेगुलर) विमानों का प्रयोग कर श्रद्धालुओं को प्रयागराज महाकुंभ में लाने और ले जाने का काम किया।
* इस महापर्व में राष्ट्रीय राजमार्गो द्वारा 3.5 लाख वाहन(सरकारी, गैर सरकारी,निजी और अन्य वाहन) प्रयागराज पहुंचे।
* मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के बाद प्रतिदिन लगभग 1.27 करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाई गई।
* 28.2 करोड़ रुपए की राशि जीएसटी और टैक्स के रूप में आय पूरे महाकुंभ के दौरान हुई जो किसी भी आयोजन में सबसे ज्यादा है।
* लगभग औसतन 22.68 लाख रुपए दान के रूप में इस महा आयोजन में श्रद्धालुओं के द्वारा प्रतिदिन दिए गए।
* नेत्र कुंभ के दौरान 1.56 लाख श्रद्धालु अपने नेत्र संबंधित उपचार से लाभान्वित हुए।
* भारतीय सेना के तीनों नेतृत्व ने मिलकर श्रद्धालुओं के लिए कार्यरत रहे और समापन के दौरान वायुसेना के विमानों ने श्रद्धालुओं को अपने करतबों से आनंदित कर बिदाई अलंकार प्रस्तुत किया गया।
जहां इस पूरे आयोजन में सरकार ने लगभग केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 3000 करोड़ से ज्यादा के कार्य किए गए, वहीं आगामी 2031 में होने वाले अर्ध कुंभ के आयोजन के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। जिसके लिए कल 1200 करोड़ के कई दूरगामी पर कार्यक्रम एवं प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान कर दिया गया है। जिसके लिए केंद्र में राज्य सरकार द्वारा बजट भी पारित कर दिया गया है।
इस पूरे आयोजन में कई छोटी-मोटी अवस्थाएं हुई, लेकिन पूरे आयोजन को एक दृष्टि से देखे तो, इस पूरे आयोजन में जिस तरीके से कार्य किया गया वह सराहनीय था इस महाकुंभ आयोजन में क्या हिंदू क्या मुस्लिम क्या सिख सभी ने मंदिर मस्जिद मदरसे विद्यालय श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए और उनके लिए भंडारे का आयोजन किया क्योंकि जहां अनुमानित श्रद्धालुओं की संख्या 40 से 45 करोड़ के बीच आकी गई थी, वहीं 66.31 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन ने सभी को आश्चर्यचकित एवं विस्मित कर दिया था। जिसके कारण महाकुंभ 2081 में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा दिन-रात मेहनत कर उन्हें समुचित एवं सुव्यवस्थित स्नान व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके। स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो जिस तरीके से स्वास्थ्य विभाग ने महाकुंभ 2081 में होने वाले घटनाओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से नियंत्रित करते हुए रोगियों घायलों को उपचार पर दिया यह भी काबिले तारीफ था ढाई सौ से ज्यादा एम्बुलेंस सर्विसेज पूरे महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचने या फिर उनके गंतव्य तक पहुंचने में सहायता दी। 4.30 हजार से ज्यादा स्वास्थ कर्मियों मैं अपने कार्यक्षेत्र में लग रहे तथा आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और उनके उपचार पर कटिबद्ध रूप से कार्यरत रहे।
