प्रयागराज। फुटपाथ ही उसका बिस्तर था और आसमान उसकी छत पर किस्मत को शायद यह भी मंजूर नहीं था। तभी तो देर रात काल बनकर कार ने उसे हमेशा के लिए सुला दिया। हादसे में बुजुर्ग महिला की गुमनाम मौत के बाद आरोपी कार सवारों ने भी उसे अस्पताल पहुंचाना मुनासिब नहीं समझा और फरार हो गए। मौके पर जुटी भीड़ में लोगों की जुबां पर यही सवाल था कि हाईकोर्ट फ्लाईओवर के समीप हुए हादसे में क्या मृतका और घायलों को न्याय मिलेगाकैंट क्षेत्र के न्याय विधि हनुमान मंदिर फ्लाईओवर के नीचे शुक्रवार रात करीब 11:15 बजे तीन वृद्ध महिलाएं व उनके साथ अन्य पुरुष वबच्चे सोए हुए थे। जिंदगी में उनका सहारा बस एक फटी चादर, थैली और फ्लाईओवर के नीचे का वो कोना था जहां वो हर रात में चैन की झपकीलेते थे। दिनभर मेहनत मजदूरी, भूख, थकान और जीवन की ठोकरों के बीच इन्हें शायद न्यायालय परिसर का कोना ही थोड़ा सुरक्षित लगता था। दिनभर की थकान मिटाने के लिए फुटपाथ को बिस्तर और आसमान को चादर बनाकर अभी सोए ही थे कि बेकाबू कार मौत बनकर आई और एक के बाद एक चार लोगों को रौंद डाला। बुजुर्ग महिला मौके पर ही हमेशा के लिए खामोश हो गई, जबकि तीन अन्य को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया। मृतका और घायल महिलाओं के पास न कोई पहचान पत्र था न परिवार का कोई सदस्य जोअस्पताल आकर उनका हाथ थामे । वे कौन थीं और कहां से आई थीं यह शायद कोई जानेगा भी नहीं। हादसे के बाद मौके पर एक सवाल और था क्या सड़क किनारे सोना गुनाह था।
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि हमारे समाज की संवेदनहीनता की तस्वीर है। । जब बुजुर्गों की जिंदगी फुटपाथ के हवाले हो जाए तो यह शासन-प्रशासन ही नहीं, पूरे समाज के की भी विफलता है। वृद्धा हमेशा लिए गुमनामी में खो गई लेकिन उसकी मौत हमें आईना दिखा गई कि जिंदगी की बड़ी त्रासदी शायद गुमनाम मर जाना है।
