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बच्चों की सुरक्षा बनाम मानवता : 8 साल से कैद युवक की कहानी

बच्चों का गला दबाने से खुद को रोकने के लिए 36 वर्षीय युवक अपने हाथ बांधकर आठ साल से घर में कैद है। सिर्फ दैनिक क्रियाओं के लिए हाथ खोलता है। चिकित्सक इसे ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) से पीड़ित बता रहे हैं। इसे हिंदी में मनोग्रसित-बाध्यता विकार कहते हैं।

 

कौशाम्बी निवासी युवक के दो बड़े व एक छोटा भाई है। मां का देहांत तीन साल पहले हो गया और पिता बुजुर्ग है। दोनों बड़े भाई अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं। आठ साल से युवक का इलाज कौशाम्बी के एक अस्पताल में चल रहा था। लाभ न मिलने पर पिता शनिवार को कॉल्विन अस्पताल लेकर पहुंचे। इस दौरान युवक के दोनों हाथ बंधे थे।

 

मनोवैज्ञानिक के काउंसलिंग करने पर युवक ने बताया कि उसे लगता है कि वह बच्चों का गला दबाकर मार देगा।

पिता ने बताया कि आठ साल पहले युवक को गाली देने की आदत थी। उसके तीन से चार महीने बाद उसने क्षेत्र के दो तीन बच्चों का गला दबाने का प्रयास किया। उस दौरान स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया था। इसके बाद परिजनों ने भूत-प्रेत का साया मानकर युवक का हाथ बांध दिया। कुछ दिनों के लिए घर पर ही रखा था। इसके बाद युवक खुद ही अपने हाथ बांधकर घर में कैद हो जाता है। परिजनों के काफी समझाने पर भी उसने अपने हाथ नहीं खोले। वह कहने लगा कि अगर उसके हाथ खुले तो वह अपने छोटे भाई के दोनों बच्चों का गला दबा देगा।

 

ओसीडी में अवांछित विचारों और भय का एक पैटर्न होता है जिसे जुनून कहा जाता है। यह जुनून बार-बार एक ही व्यवहार करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसे मजबूरी भी कहा जाता है। ये जुनून और मजबूरियां रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा डालती है और बहुत परेशानी का कारण बनती हैं।

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