2003 से लेकर 2025 के बीच लोकसभा और विधानसभा के कई चुनाव बीत गए लेकिन वोटर लिस्ट से मृत मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए। यही वजह है कि अनुपस्थित, शिफ्टेड, डुप्लीकेट व मृत (एएसडी) श्रेणी में चिह्नित किए गए 11.70 लाख वोटरों में 1.76 लाख मृत मतदाता शामिल हैं ।
मुट्ठीगंज में आर्य कन्या चौराहे के पास रहने वाले सतीश चंद्र वर्मा का निधन वर्ष 2005 में हो गया था और उनकी पत्नी प्रेमा वर्मा का निधन 2022 में हुआ। दुनिया छोड़ चुके पति-पत्नी का नाम 2025 की वोटर लिस्ट में बना रहा। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत हुई तो 20 साल बाद यह पता चला कि सतीश चंद्र वर्मा का निधन हो चुका है और तीन साल पहले उनकी पत्नी भी नहीं रहीं।
पति-पत्नी पत्नी दोनों को एएसडी श्रेणी में चिन्हित कर लिया गया है। यह तो सिर्फ दो उदाहरण हैं, वोटर लिस्ट में ऐसे एक लाख 76 हजार 750 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि पिछले चुनावों में बीएलओ की वोटर लिस्ट तैयार कराने में क्या भूमिका रही।
आखिर मृत मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से क्यों नहीं काटे गए। अगर एसआईआर अभियान की शुरुआत न होती तो शायद इन मृत मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में बने रहते और किसी का ध्यान भी नहीं जाता ।
