नई दिल्ली। बढ़ते व्यापार, कई देशों के बीच लंबे समय तक चल रहे तनाव और उन्नत देशों के नीतिगत फैसलों से पड़ने वाले प्रभावों से उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दुनियाभर में जारी अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण आर्थिक पृष्ठभूमि के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक विकास का एक प्रमुख चालक बनी हुई है।
आरबीआई की सोमवार को जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की वृद्धि की मुख्य वजह घरेलू मांग में उछाल है, इसलिए यह वैश्विक चुनौतियों से अछूती है। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से बढ़ रही है, जो महंगाई में लगातार कमी के साथ व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता में मदद कर रही है। घरेलू वित्तीय प्रणाली बैंकों और गैर-बैंकिंग कंपनियों की स्वस्थ बैलेंस शीट से मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय बाजारों में कम अस्थिरता और उदार मौद्रिक नीति से समर्थित वित्तीय स्थितियां आसान हुई हैं। अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली टैरिफ के झटकों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। हालांकि, देशों के बीच संघर्ष बढ़ना प्रमुख जोखिम बना हुआ है। शहरी सहकारी बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत हुई। जीवन और सामान्य बीमा क्षेत्र बेहतर बने हुए हैं।
