प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में संभल की जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई को लेकर दाखिल एएसआई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्षकारों ने आपत्ति दाखिल कर सवाल उठाए हैं। कहा कि लगभग सौ साल से रमजान के मौके पर मस्जिद की रंगाई-पुताई होती आ रही है। मामले में अब तक मौन रही एएसआई की आपत्ति हैरान करने वाली है।
आपत्ति में कहा गया कि मस्जिद के उन स्थानों को जानबूझकर सर्वे में शामिल नहीं किया गया, जहां वास्तव में रंगाई पुताई की जरूरत है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों पर एएसआई को 10 मार्च तक जवाब दाखिल करने की मोहलत दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने मस्जिद कमेटी की पुनरीक्षण अर्जी में दाखिल तत्काल सुनवाई की अर्जी पर दिया है।
मस्जिद कमेटी ने रमजान के पवित्र महीने में कथित मस्जिद की रंगाई-पुताई और लाइटिंग के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है। न्यायालय ने इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को कहा था कि वह सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे कि रंगाई-पुताई की जरूरत है या नहीं। इस पर एएसआई ने रिपोर्ट में कहा कि मस्जिद की रंगाई पुताई की अभी कोई जरूरत नहीं है। अब इसके खिलाफ मस्जिद कमेटी ने मंगलवार को न्यायालय में आपत्ति दाखिल की है। कमेटी के अधिवक्ता एसएफए नकवी और जहीर असगर ने रिपोर्ट का कड़ा विरोध किया। दलील दी कि हाईकोर्ट के निर्देशों को पालन नहीं किया गया। रोक के बावजूद सर्वे के दौरान पुलिसकर्मी और प्रशासन के कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। वहीं कमेटी के सचिव को सर्वे के दौरान अनुमति नहीं दी गई। यह भी दलील दी कि रंगाई-पुताई व लाइटिंग के लिए अर्जी दाखिल की गई थी, लेकिन दबाव के चलते पूरी रिपोर्ट मरम्मत आदि पर केंद्रित कर मुख्य मुद्दे को उलझा दिया गया है।
कमेटी ने जामा मस्जिद की कुछ तस्वीरें भी प्रस्तुत की जिसमें दिखाया गया है कि दीवारों, गुंबदों और मीनारों की रंगाई पुताई की जरूरत है। कमेटी ने कहा कि एएसआई समझौते के अनुसार, संरक्षक है मालिक नहीं। कोर्ट से मांग की गई कि एएसआई की रिपोर्ट को खारिज किया जाना चाहिए। वहीं, एएसआई व अन्य पक्षकारों ने कमेटी की आपत्ति पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने आगामी सुनवाई के लिए 10 मार्च की तिथि नियत की है।
