अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ में अतार्किक बढ़ोतरी के आर्थिक नतीजों की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी का जापान दौरा, यों तो 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी इस देश की आठवीं यात्रा है, लेकिन इसे लेकर देश-दुनिया में ऐसी उत्सुकता शायद ही कभी देखी गई हो। विदेश सचिव का यह कहना काफी कुछ कह देता है कि उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रधानमंत्री की जापान यात्रा कई नई पहलों के शुरू होने का अवसर भी बनेगी। यही नहीं, प्रधानमंत्री का यह कहना कि भारत और जापान एक-दूसरे के लिए बने हैं, तब और भी अधिक औचित्यपूर्ण लगता है, जब जापानी वाहन निर्माता कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने अगले पांच से छह वर्षों में देश में 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री मोदी के दो-दिवसीय जापान दौरे से क्वाड समूह के भविष्य की दिशा को लेकर भी संकेत मिलने की उम्मीद है। क्वाड समूह का औपचारिक उद्देश्य ही सदस्य देशों-अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकना था। लेकिन, हाल ही में जिस तरह से जापान के प्रतिनिधिमंडल ने टैरिफ पर चर्चा के लिए अपनी अमेरिका यात्रा को रद्द कियाऔर चीन व भारत के बीच भी नजदीकी बढ़ी है, उसे देखते हुए क्वाड के भविष्य पर एक प्रश्नचिह्न तो खड़ा हो ही गया है। हालांकि, इस दौरान भारत व जापान के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा हुई है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों द्वारा शुरू की गई आर्थिक सुरक्षा पहल में, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, औषधियां, सूचना व संचार और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा। भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अगले दस वर्षों में जापान की तरफ से भारत में सौ खरब येन के निवेश का लक्ष्य रखा है, जो यकीनन द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत जैसा होगा। जापान की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में शिरकत करने के लिए चीन जाएंगे। खबरें हैं कि भारत रूस से तेल-खरीद को बढ़ाने जा रहा है। ऐसे में, भारत के जापान, चीन और रूस के साथ प्रगाढ़ होते रिश्ते उल्टे राष्ट्रपति ट्रंप को ही अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दें, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
