नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को मंजूरी देने की समय सीमा को लेकर राष्ट्रपति के संदर्भ पर केंद्र व राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
तमिलनाडु में विधेयकों को मंजूरी देने को लेकर सरकार और राज्यपाल के बीच चले विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को फैसला सुनाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शीर्ष अदालत के फैसले पर 13 मई को 14 सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट को एक संदर्भ भेजा था। शीर्ष अदालत अब इन प्रश्नों पर विचार विमर्श कर जवाब तलाशने की प्रक्रिया में है।
सीजेआई जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस चंदुर कर की विशेष पीठ ने कहा कि यह मुद्दा पूरे देश को प्रभावित करेगा। वह केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी करेगी और नोटिस का जवाब एक सप्ताह में देना होगा। पीठ ने संकेत दिया कि वह अगस्त में इस मामले की सुनवाई शुरू करेगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने पीठ के समक्ष दलील दी कि वह केरल की ओर से पेश हो रहे हैं और उनके मुवक्किल मामले की सुनवाई की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीठ के समक्ष यह मुद्दा उठाना अभी जल्दबाजी होगी। पीठ ने कहा कि वह अगले मंगलवार (29 जुलाई) को बैठक करेगी। वहीं तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने कहा कि वह भी विचारणीयता का मुद्दा उठा रहे हैं और इस बात पर जोर दिया कि इसका सीधा असर उनके मुवक्किल पर पड़ेगा इस पर सीजेआई ने कहा कि इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा
