सड़कों पर आखिर क्यों बनाई जाती है सफेद धारियां
जब कभी भी हम घूमने जाते हैं तो हमें सड़क के बीचो-बीच और किनारे सफेद पटिया जरूर दिखाई देती है ।यह पट्टियां सड़कों की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है ।लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि सड़कों पर इस तरह की सफेद पट्टियां क्यों बनाई जाती है और इन्हें बनाने की शुरुआत कैसे हुई??

19वीं सदी तक सड़कों पर कारों की संख्या कम थी ।जिसमें कोई बड़ी समस्या नहीं होती थी ।कारों के साथ साइकिल और पैदल यात्रियों की आवाजाही भी होती थी। उस समय कारों की गति भी कम थी लेकिन बाद में कारों की बढ़ती रफ्तार और उनकी संख्या ने सड़कों पर ऐसे निशान को जरूरी बना दिया। जो दोनों तरफ चलने वाली गाड़ियों को उनके चलने की निर्धारित जगह बता सके ।एक ही सड़क पर आमने-सामने चलने वाली गाड़ियां अगर अपनी मर्जी के मुताबिक चलने लगे तो दुर्घटना होने की संभावना पूरी रहती है।
इसलिए सड़कों के बीच एक सफेद पट्टी लगाकर उसे दो भागों में बांटने का विचार पहली बार 1911 में एक अमेरिकी नागरिक एडवर्ड एन हाइंस को आया। जब सड़क पर किसी गाड़ी से टपकता हुआ दूध एक सफेद निशान छोड़ दिया। बीच में बनने वाली इस लाइन का इस्तेमाल पहली बार 1911 में वेन काउंटी (अमेरिका) के ट्रेंटन में’ रिवर रोड’ पर किया गया था। अब सफेद लाइन नियमित रूप से आने और जाने वाली गाड़ियों के लिए सड़क को अलग-अलग लेन में बांटने के लिए बनाई जाती है। राजमार्ग परिवहन के इतिहास में इस विचार को महत्वपूर्ण यातायात सुरक्षा उपकरणों की मान्यता दी गई।
Samiksha
