प्रयागराज। नगर निगम सदन की बैठक में दूसरे दिन शुक्रवार को भी जलभराव का मुद्दा छाया रहा। पार्षदों ने शहर को दुर्दशा व लोगों की परेशानी के लिए प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) व गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि अफसरों की लापरवाही ने शहर की जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
जार्जटाउन, टैगोरटाउन, दारागंज, अल्लापुर, सिविल लाइंस, नैनी, करेली समेत सभी क्षेत्रों के पार्षदों ने जलभराव की समस्या उठाई। उनका कहना था कि जहां कभी पानी नहीं भरा, वहां भी इस बार घुटनों तक पानी भर गया। ज्यादा शिकायतें पोडीए को सड़कों व नालों को लेकर रहीं। पार्षदों का कहना था कि पीडीए को नालियों की स्लोप ठीक नहीं है। नालियां आगे जाकर बंद हो गई हैं। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
पार्षदों का यह भी कहना था कि जगह-जगह सीवर लाइनें धंस गई है। इसकी वजह से पानी नहीं निकल पा रहा है। लगातार शिकायतों के बाद भी इन्हें ठीक नहीं किया गया है। सीवर लाइन के ढक्कन भी सड़क निर्माण के दौरान ढक दिए गए। बारिश से पहले उनकी तलाश नहीं की गई, इसकी वजह से सफाई भी नहीं हो पाई।
जल निगम व गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के ढक्कन को लेकर ज्यादा समस्या है। इसके अलावा पीडीए की सड़कों को लेकर भी शिकायतें हैं। सड़क निर्माण के दौरान ढक्कन ढक दिए गए। ये ढक्कन ऊपर कौन करेगा इसे लेकर भी विवाद है। कोई भी विभाग इसकी जिम्मेदारी नहीं लेने को तैयार नहीं है। जलभराव का यह भी बड़ा कारण है।स्ट्रीट लाइट न जलने का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। पार्षदों का कहना था कि पीडीए ने जिन सड़कों का निर्माण किया है व स्ट्रीट लाइट लगवाई हैं, वहां ज्यादा समस्या है। पीडीए के अन्य कार्यों को लेकर भी आपत्ति रही।
बैठक में पेयजल समस्या केसमाधान, जलकर के दो वर्ष के एरियर के समायोजन, त्योहारों के मद्देनजर सड़कों की मरम्मत समेत अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने आदि मुद्दे भी उठे और संकल्प पारित किए गए। इस दौरान यह संकल्प भी पारित किया गया कि यमुना में न्यूनतम जलस्तर बनाए रखने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा ताकि इंटेकवेल से जलापूर्ति बाधित न हो।
वहीं पार्षदों ने अस्थायी सफाई कर्मियों की नियुक्ति में गड़बड़ी का आरोप भी लगाया। विनय मिश्रा सिंदू का कहना था कि स्लूज गेट के जाल की सफाई के लिए 12 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। अपर नगर आयुक्त ने महापौर समेत अन्य अफसरों को यह बताया है लेकिन स्लूज गेट बंद हुए 61 दिन हो चुके हैं और अभी तको कोई कर्मचारी सफाई के लिए ‘नहीं पहुंचा है। उन्होंने इसमें भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया।
