Homeदेशसदियों पुराने रिश्तों पर नई शर्त: इमीग्रेशन सर्टिफिकेट में फंसी नेपाली बहुएं

सदियों पुराने रिश्तों पर नई शर्त: इमीग्रेशन सर्टिफिकेट में फंसी नेपाली बहुएं

भारत और नेपाल के बीच सदियों से रोटी-बेटी का गहरा रिश्ता रहा है। खुली सीमा, सांस्कृतिक समानता और सामाजिक मेल-जोल के कारण हर साल सैकड़ों पारिवारिक रिश्ते दोनों देशों के बीच जुड़ते हैं। खासतौर पर सीमावर्ती जिलों में नेपाली बहुएं भारतीय परिवारों का अभिन्न हिस्सा रही हैं, लेकिन अब इन्हीं रिश्तों के बीच एसआईआर की दीवार खड़ी हो गई है, जिसने हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। एसआईआर प्रक्रिया के तहत नो-मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में नेपाल से विवाह कर आईं बहुएं भी शामिल हैं।

समस्या तब खड़ी हो रही है, जब इन बहुओं से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या सत्यापन के लिए इमीग्रेशन/प्रवासन सर्टिफिकेट की मांग की जा रही है, जबकि भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण ज्यादातर नेपाली बहुएं बिना किसी औपचारिक इमीग्रेशन दस्तावेज के ही विवाह कर भारत आती रही हैं।

यह स्थिति सिर्फ बहराइच जिले तक श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में भी नेपाली बहुएं और उनके परिवार इसी समस्या से जूझ रहे हैं। अचानक इमीग्रेशन सर्टिफिकेट की शर्त ने ससुराल और मायके, दोनों पक्षों को असमंजस में डाल दिया है। न तो परिवारों को यह स्पष्ट है कि यह सर्टिफिकेट कैसे और कहां से बनेगा और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस मार्गदर्शन सामने आया हैं।

बहराइच जिले की बात करें तो यहां लगभग 22 हजार से अधिक नेपाली बहुएं ऐसी बताई जा रही हैं, जिन्हें एसआईआर सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। कमोबेश यही हाल अन्य सीमावर्ती जिलों का भी है। कई परिवार कुछ मायके पक्ष के लोग नेपाल में संबंधित सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश में परेशान हैं। बाबागंज ब्लॉक मुख्यालय पहुंचीं अर्पना साहू परेशान हैं। यही हाल कहारनपुरवा निवासी सुरेखा का मायका नोनबरसा नेपाल में है, वह तीन दिन से का भी है। उनका कहना है कि रोटी-बेटी के पारंपरिक और भावनात्मक रिश्तों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझाकर कमजोर किया जा रहा है। यदि समय रहते इस समस्या का व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो हजारों नेपाली बहुएं न सिर्फ मताधिकार से वंचित हो सकती हैं, बल्कि उनके सामाजिक अधिकारों पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

जांनिए कैसे जारी होगा प्रमाणपत्र यह प्रमाणपत्र : नेपाल सरकार के स्थानीय निकाय द्वारा जारी किया जाता है। ग्राम पालिका / नगर पालिका कार्यालय जहां आवेदन किया जाता है।

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