लंबे इंतजार के बाद पार्टी की सक्रिय सदस्यता ग्रहण करते ही जदयू में नीतीश के बाद अब निशांत युग की शुरुआत हो गई है। हालांकि निशांत की सियासी पारी ऐसे समय में शुरू हुई है जब अस्वस्थ नीतीश की अचानक घोषित नई सियासी यात्रा के कारण पार्टी में भारी ऊहापोह और कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
बीते ढाई दशक से वन मैन शो रहे नीतीश के बिना पार्टी के अस्तित्व और भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में निशांत की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत में ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह बेहतर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तरह वाकई बेहतर पॉलटिकलnइंजीनियर भी साबित होंगे?
दरअसल बिहार की सियासत में निशांत की चर्चा हमेशा उनके सौम्य स्वभाव और सरल व्यक्तित्व की हुई है। वह इसलिए कि दो दशक मुख्यमंत्री आवास में रहते हुए भी उनकी पर्दे के पीछे से भी राजनीति में दिलचस्पी लेने की सूचना कभी नहीं आई। पिता के सीएम बनने के दो दशक बाद निशांत बीते चुनाव में चुनिंदा जगहों पर सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए मगर तब भी न तो कभी किसी जनसभा को संबोधित किया और न ही कभी किसी पार्टी के लिए वोट ही मांगते नजर आए l
