इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी के सेवानिवृत्ति बकाये से जीएसटी और प्रोत्साहन अग्रिम, त्योहार अग्रिम की कटौती करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। साथ ही उप्र राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के अधिशासी निदेशक को निर्देश दिया कि एक महीने के भीतर बिना किसी कटौती के सभी सेवानिवृत्ति बकाया और बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मेरठ निवासी सतीश कुमार वर्मा की याचिका पर दिया है। सतीश का सेवानिवृत्त बकाया कुल 15,71,604 रुपये हुआ था। इसमें से 4,55,100 रुपये की अवैध कटौती की गई थी। इसमें जीएसटी रिकवरी के नाम पर 56,253.38 और ऑडिट पर 79,762 काटे गए थे। याची ने इसे चुनौती दी तो हाईकोर्ट ने विभाग के निदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अधिशासी निदेशक हलफनामे में न तो बकाया वेतन का सही विवरण दिया गया और न ही भुगतान की स्पष्ट समयसीमा बताई गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारी केवल समय बर्बाद कर रहे हैं। न्यायालय को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में आदेश का पालन नहीं होता है तो अधिशासी निदेशक को 19 मार्च 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।
साथ ही कोर्ट ने प्रमुख सचिव, खाद्य एवं रसद को पूरे मामले की जांच करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। 19 मार्च को सुनवाई होगी।
