नई दिल्ली। भारत में होने वाली कुल मौतों में करीब एक-तिहाई (31 प्रतिशत) हृदय संबंधी रोगों के कारण होती है। यह जानकारी भारत के महापंजीयक के अधीन नमूना पंजीयन सर्वेक्षण (एसआरएस) की तरफ से जारी नवीनतम आंकड़ों में सामने आई।मृत्यु के कारणों पर रिपोर्ट: 2021-2023 में बताया गया है कि देश में गैर-संक्रामक रोग मौतों का मुख्य कारण हैं। कुल मौतों में 56.7 प्रतिशत गैर-संक्रामक रोगों की वजह से ही होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रामक, मातृत्व, नवजात और पोषण संबंधी स्थितियों से मौत का आंकड़ा 23.4 प्रतिशत है। वर्ष 2020-2022 (जो कोविड-19 से प्रभावित रहा) में ये आंकड़े क्रमशः 55.7 प्रतिशत और 24.0 प्रतिशत थे। रिपोर्ट बताती है कि कुल मिलाकर हृदय रोग मौतों का एक एक बड़ा कारण बने हुए हैं। इसके बाद श्वसन संक्रमण (9.3 प्रतिशत), कैंसर व अन्य ट्यूमर (6.4 प्रतिशत), और श्वसन रोग (5.7 प्रतिशत) जानलेवा साबित होते हैं। अन्य कारणों में पाचन संबंधी रोग (5.3 प्रतिशत), अज्ञात कारणों से बुखार (4.9 प्रतिशत), गैरइरादतन चोट (मोटर वाहन दुर्घटनाओं को छोड़कर) 3.7 प्रतिशत, मधुमेह (डायबिटीज) 3.5 प्रतिशत, और जनन-मूत्र संबंधी रोग (3.0 प्रतिशत) आदि शामिल हैं। 15-29 आयुवर्ग में आत्महत्या सबसे आम वजह हृदय रोग जीवनशैली से जुड़ी बीमारी मानी जाती है। यह 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की मौत का प्रमुख कारण है, जबकि 15-29 वर्ष की आयु के समूह में आत्महत्या (इरादतन चोट) मौत का सबसे आम कारण है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चोटों से होने वाली मौतों के मामले 9.4 प्रतिशत है, जबकि अस्पष्ट कारणों से हुई मौतें 10.5 प्रतिशत हैं। हालांकि, 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में से ज्यादातर की मौत का कारण अस्पष्ट पाया गया।
