नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दी। लोकसभा में महज 12 मिनट तो राज्यसभा में सिर्फ 16 मिनट कामकाज हो पाया। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने तख्तियां लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष ओम बिरला ने अपील की कि जनता की बात रखने के अवसर को नारेबाजी और तख्तियां दिखाकर न गंवाएं। पर सदस्यों पर कोई असर नहीं पड़ा।
मानसून सत्र का पहला सप्ताह ऑपरेशन सिंदूर, तो दूसरा सप्ताह एसआईआर पर विपक्ष के हंगामे के नाम रहा। ऑपरेशन सिंदूर पर-दो दिनों की विशेष चर्चा के बाद दोनों सदनों की तीन-तीन दिनों की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। लोकसभा में शुक्रवार सुबह महज तीन मिनट में कार्यवाही दो बजे तक स्थगित हो गई। कार्यवाही स्थगित करने से पहले बिरला ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से कहा, आप इस तरह जनता की अभिव्यक्ति नहीं कर रहे। लोकतंत्र को मजबूत करना है, तो सदस्यों को प्रश्न उठाने देने होंगे, जिस पर सरकार की जवाबदेही तय होगी। बाद में दोपहर दो बजे कार्यवाही फिर शुरू होने पर सरकार ने विपक्ष से गोवा राज्य सभा निर्वाचण एसटी प्रतिनिधित्व समायोजन विधेयक पर चर्चा का अनुरोध किया। कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि विधेयक एसटी वर्ग का हितैषी है। इस बीच, विपक्षी सदस्य आसन के निकट पहुंच गए और एसआईआर वापस लो के नारे लगाने लगे। पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि जनजातियों से संबंधित विधेयक पर चर्चा न करना, दिखाता है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रति विपक्ष का रुख कैसा है।
